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चिंताजनक: हर आठवां इंसान इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या का शिकार, इससे हृदय रोगों का भी बढ़ जाता है जोखिम

Sun, 14 Jul 2024 07:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बढ़ते वजन की समस्या - फोटो : istock
दुनियाभर में तेजी से बढ़ती क्रोनिक बीमारियों के लिए मोटापा या अधिक वजन की स्थिति को प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। दुर्भाग्यवश साल-दर-साल ये समस्या बढ़ती ही जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक हालिया रिपोर्ट परेशान करने वाली तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर हर आठ में से एक व्यक्ति मोटापे की श्रेणी में आता है।

विशेषज्ञों ने कहा, मोटापा सिर्फ एक कॉस्मेटिक चिंता नहीं है, यानी कि इससे सिर्फ शरीर की बनावट ही खराब नहीं होती है बल्कि इसे कई गंभीर और क्रोनिक बीमारियों का प्रमुख कारक भी माना जाता है।

डॉक्टर बताते हैं, जिन लोगों को मोटापे की समस्या है उनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, जोड़ों के विकारों के साथ कुछ प्रकार के कैंसर का भी खतरा बढ़ जाता है। आंकड़े ये भी बताते हैं कि दुनिया की बड़ी आबादी अधिक वजन के कारण कई गंभीर बीमारियों के चपेट में है, जिससे संभावित रूप से जीवन की गुणवत्ता और जीवन प्रत्याशा में गिरावट आने का खतरा है।
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मोटापे के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : istock
हर उम्र में देखी जा रही है मोटापे की समस्या

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अनुमानित 25 मिलियन (2.5 करोड़) बच्चे मोटापाग्रस्त हो सकते हैं, जिससे भविष्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भारी बोझ का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की शुरुआत होने की औसत आयु भी कम होती जा रही है। तेजी से बढ़ते हृदय रोग-हार्ट अटैक के ज्यादातर मामले भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अधिक वजन से संबंधित माने जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोटापे के कारण तीन बीमारियों के मामले सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं जिनके बारे में जानना और बचाव के प्रयास करते रहना सभी के लिए बहुत आवश्यक है।
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बच्चों में मोटापे की समस्या - फोटो : istock
बच्चों में मोटापे का खतरा

डब्ल्यूएचओं की रिपोर्ट के मुताबिक बचपन और किशोरावस्था में अधिक वजन होना कई तरह से स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह विभिन्न गैर-संचारी रोगों जैसे कि टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग के जोखिम और इसके समय से पहले होने के खतरे को बढ़ाने वाली समस्या है।

बचपन और किशोरावस्था में मोटापे के प्रतिकूल साइकोसोशल परिणाम भी होते हैं, जिसमें स्कूल के प्रदर्शन और जीवन की गुणवत्ता से संबंधित समस्याएं, कलंक और भेदभाव की दिक्कत भी देखी जाती रही है। मोटापा के कारण 20 की उम्र तक बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी बढ़ जाता है जिससे हृदय रोगों का जोखिम हो सकता है।

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : istock
हृदय रोग और डायबिटीज की समस्या 

किसी भी उम्र में मोटापे के कारण आपमें उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने की आशंका हो सकती है जो हृदय रोग और स्ट्रोक के लिए जोखिम कारक है। इसी तरह मोटापा शरीर द्वारा रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का उपयोग करने के तरीके को भी प्रभावित कर सकता है। इससे इंसुलिन प्रतिरोध और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।

अधिक वजन वाले लोगों में हृदय रोग-डायबिटीज दोनों का खतरा, स्वस्थ वजन वालों की तुलना में ज्यादा देखा जाता रहा है।
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लिवर में होने वाली दिक्कतें - फोटो : istock
फैटी लिवर डिजीज के हो सकते हैं शिकार

मोटापा, फैटी लिवर रोग के जोखिम को भी बढ़ा देता है। ये भारत में तेजी से बढ़ती लिवर की समस्या है। हाल ही में नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चौंकाने वाला डेटा प्रस्तुत किया था। केंद्रीय मंत्री ने बताया, देश में हर तीसरे व्यक्ति को फैटी लिवर डिजीज की समस्या हो सकती है।

इस बीमारी में लिवर में वसा जमा होने लगती है जिससे लिवर को गंभीर क्षति और लिवर सिरोसिस जैसी घातक बीमारियों का भी जोखिम हो सकता है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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