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वैज्ञानिकों ने चेताया: नाइट-शिफ्ट करने वालों में इस गंभीर बीमारी का जोखिम अधिक, महिलाएं रहें विशेष सावधान

Sat, 21 Aug 2021 07:26 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नाइट शिफ्ट में काम करना नुकसानदायक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
जिन कंपनियों का काम 24 घंटे का होता है वहां आमतौर पर कर्मचारियों को दो पाली में काम करना होता है- दिन पाली और रात पाली। काम के सुचारू ढंग से जारी रहने के लिए यह व्यवस्था आवश्यक होती है, पर क्या आप जानते हैं अलग-अलग पालियों में काम करने का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? वैज्ञानिकों ने इसी से संबंधित एक हालिया शोध में बड़ा खुलासा किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जो लोग ज्यादातर रात की पाली में काम करते हैं, उनमें हृदय रोगों के विकसित होने का खतरा अधिक होता है। मतलब, सेहत के लिहाजे से रात पाली में काम करने को विशेषज्ञ नुकसानदायक मानते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम के नेतृत्व में किए गए अध्ययन से पता चला है जो लोग रात की पाली में ज्यादा काम करते हैं उनमें अक्सर असामान्य रूप दिल के धड़कन के तेज होने की समस्या विकसित होने का खतरा रहता है। इस स्थिति को मेडिकल की भाषा में 'एट्रियल फाइब्रिलेशन' के नाम से जाना जाता है। यह स्थिति हृदय से संबंधित गंभीर जटिलताओं के विकसित होने का कारण बन सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि नाइट शिफ्ट किस तरह से हृदय के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है?
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रात की पाली में काम करने से बढ़ सकता है हृदय रोगों का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
नाइट शिफ्ट और हृदय रोगों का खतरा
रात की पाली में काम करना लोगों के लिए किस प्रकार से नुकसानदायक हो सकता है? इस बारे में जानने के लिए वैज्ञानिकों ने करीब 283,657 लोगों के डेटा का अध्ययन किया। इस डेटाबेस के अध्ययन से पता चलता है कि पूरे जीवनकाल में जो लोग जितना अधिक समय तक रात की पाली में काम करते हैं, उन लोगों में एट्रियल फाइब्रिलेशन विकसित होने का खतरा उतनी ही अधिक होता है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि रात की पाली में काम करने से अन्य प्रकार के हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है, हालांकि यह स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर स्थितियों के विकसित होने की आशंका कम होती है। 
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हृदय रोगों का बढ़ सकता है खतरा - फोटो : social media
कई स्तरों पर किया गया अध्ययन
तमाम विश्वविद्याल के शोधकर्ताओं की टीम ने अध्ययन में एट्रियल फाइब्रिलेशन के आनुवंशिक जोखिमों का मूल्यांकन भी किया। इसके लिए शोधकर्ताओं ने इस स्थिति से संबंधित करीब 166 जेनेटिक वैरिएंटमस का मूल्यांकन किया। हालांकि अध्ययन के निष्कर्ष में  पाया गया कि आनुवंशिक जोखिम, रात की पाली में काम करने और एट्रियल फाइब्रिलेशन के बीच की कड़ी को प्रभावित नहीं करते हैं। अध्ययन के लेखकों में से एक प्रोफेसर लू कहते हैं, लगातार नाइट शिफ्ट करने वाले लोगों में यह खतरा अधिक देखा गया है। इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए नाइट शिफ्ट की आवृत्ति और अवधि दोनों कम किया जाना चाहिए।

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रात की पाली में काम करने के नुकसान - फोटो : iStock
एट्रियल फाइब्रिलेशन की बढ़ सकती है समस्या
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग स्थाई रूप से रात की पाली में काम करते हैं, उनमें केवल दिन के दौरान काम करने वाले लोगों की तुलना में एट्रियल फाइब्रिलेशन होने का खतरा 12 फीसदी तक अधिक हो सकता है। दस या उससे अधिक वर्षों के बाद यह जोखिम बढ़कर 18 प्रतिशत से अधिक हो जाता है। दस साल या उससे अधिक समय तक महीने में औसतन तीन से आठ दिनों तक रात की पाली में काम करने वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में यह जोखिम बढ़कर 22 फीसदी तक का हो सकता है।
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महिलाओं की सेहत को हो सकता है नुकसान - फोटो : pixabay
महिलाएं रहें विशेष सावधान
प्रमुख शोधकर्ता प्रो. क्यू कहते हैं, अध्ययन में दो और दिलचस्प चीजें सामने आई हैं। पहला- दस साल से अधिक समय तक पुरुषों की तुलना में नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में एट्रियल फाइब्रिलेशन की संभावना अधिक हो सकती है। और दूसरा यह कि सप्ताह में 75 मिनट या अधिक समय तक मॉडरेट इंटेंसिटी का वर्कआउट करने वाले लोगों में इस रोग का जोखिम कम हो सकता है। यानी कि अगर इस गंभीर समस्या से सुरक्षित रहना है तो लोगों को जीवनशैली में विशेष सुधार की जरूरत है।


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स्रोत और संदर्भ: 
Long-term night shift work is associated with the risk of atrial fibrillation and coronary heart disease

अस्वीकरण नोट: यह लेख यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।
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