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Monkey Fever: कर्नाटक में रिपोर्ट की गई दूसरी मौत, बढ़ते संक्रमण के लेकर अलर्ट, जानिए इसके लक्षण-बचाव के तरीके

Fri, 23 Feb 2024 01:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केरल में ‘मंकी फीवर’ की दस्तक - फोटो : self
देश के दक्षिणी राज्यों में मंकी फीवर की समस्या पिछले एक महीने से बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को यहां मंकी फीवर से एक और मौत का मामला सामने आया है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी) संक्रमित 65 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई। यह इस जिले में इस रोग से होने वाली पहली मौत है। महिला की हालत बुधवार को गंभीर हो गई थी, जिसके बाद उसकी मौत हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं केएफडी, टिक के कारण होने वाली वायरल रक्तस्रावी बीमारी है जो कुछ स्थितियों में घातक भी हो सकती है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने प्रभावित जिलों में विधायकों और स्वास्थ्य अधिकारियो से बातचीत करके स्थिति पर नियंत्रण लाने के उपाय करने की सलाह दी है।

बीमारी के प्रकोप ने राज्य में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है, बचाव के लिए भी सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है। 
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बंदरों से होने वाला संक्रमण - फोटो : Pixabay
कर्नाटक सबसे प्रभावित राज्य

मंकी फीवर से कर्नाटक सबसे प्रभावित राज्य रहा है। राज्य में इसके फिलहाल 103 एक्टिव केस हैं, अब तक दो मौतें दर्ज की गई हैं। राज्य सरकार ने प्रभावी टीकाकरण के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ बातचीत की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, जिस तरह से राज्य में मंकी फीवर के मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं, ऐसे में सभी लोगों को इससे बचाव के उपायों के लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है। राज्य में पिछले एक महीने से यह बीमारी चिंता का कारण बनी हुई है। सभी लोगों को इसके लक्षणों के बारे में जानना और सुरक्षित रहने के लिए उपाय करना आवश्यक है।
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मंकी फीवर हो सकती है गंभीर समस्याकारक - फोटो : iStock
क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज के बारे में जानिए

मंकीफीवर को क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी) भी कहा जाता है, जानवरों से इसके इंसानों में संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। जंगली इलाकों में रहने वाले लोग, जहां पर बंदरों की आबादी अधिक होती है वहां पर इसके संक्रमण के फैलने का खतरा अधिक हो सकता है। बंदरों के शरीर में पाए जाने वाले टिक्स (किलनी) के काटने से इसके इंसानों में फैलने का खतरा रहता है। पर संक्रमित व्यक्ति से दूसरों में इसके संक्रमण के प्रसार के साक्ष्य नहीं हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव के लिए सावधानी बरतते रहना आवश्यक है।

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मंकी फीवर के लक्षणों को जानिए - फोटो : istock
मंकी फीवर के लक्षण और जोखिम

मंकी फीवर की समस्या में अचानक से बुखार और अन्य लक्षण शुरू हो सकते हैं। संक्रमण का इनक्यूबेशन पीरियड (ऊष्मायन अवधि) तीन दिनों से लेकर एक सप्ताह तक की हो सकती है। शुरुआत की स्थिति में बुखार के साथ, ठंड लगने, सिरदर्द और गंभीर थकावट की समस्या हो सकती है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है इसके लक्षणों में मतली, उल्टी, पेट दर्द, दस्त, भ्रम की समस्या का खतरा भी हो सकता है। कुछ स्थितियों में इसके कारण रक्तस्राव की दिक्कत जैसे नाक और मसूड़ों से खून आने का खतरा रहता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मंकी फीवर की समस्या पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण ऑर्गन फेलियर तक की समस्या का भी खतरा हो सकता है।
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मंकी फीवर के खतरों से बचाव के करें उपाय - फोटो : Pixabay
मंकी फीवर का इलाज और बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये संक्रमण गंभीर स्थितियों में शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे ऑर्गन फेलियर हो सकती है। इस तरह के जोखिमों से बचाव के लिए जरूरी है कि समय रहते इसका उपचार किया जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मंकी फीवर के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए डॉक्टर सहायक चिकित्सा प्रदान करते हैं।

जिन क्षेत्रों में मंकी फीवर का खतरा अधिक होता है या एंडेमिक इलाकों में संक्रमण से बचाव के लिए टीके दिए जाते हैं। इसके अलावा सुरक्षात्मक कपड़े पहनने, टिक्स से बचाव करते रहना और प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा से बचने जैसे कुछ उपायों का पालन करके इस गंभीर रोग के खतरे से बचाव किया जा सकता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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