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World Menstrual Hygiene Day 2022: पीरियड्स में होती है हैवी ब्लीडिंग तो अपनाएं ये उपाय, मिलेगा बार-बार पैड बदलने से छुटकारा

Sat, 28 May 2022 11:45 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग होने पर क्या करें - फोटो : सोशल मीडिया
डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)

Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

World Menstrual Hygiene Day 2022: अधिकतर महिलाओं को हर महीने आने वाले मासिक धर्म के दौरान शारीरिक और मानसिक तौर पर कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खराब लाइफस्टाइल और पोषण की कमी के कारण पीरियड्स में महिलाओं की परेशानी बढ़ जाती है। पीरियड के दौरान हैवी ब्लीडिंग होना इनमें से एक आम समस्या है। कई किशोरियों व महिलाओं को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है या 6-7 दिनों से ज्यादा समय तक पीरियड आते हैं। इस तरह की समस्या को मेनोरेजिया कहते हैं। मेनोरेजिया हैवी मेंस्ट्रुअल फ्लो की वह समस्या है, जिसमें ज्यादा ब्लीडिंग के कारण महिलाओं को एक घंटे में कई बार पैड बदलने की जरूरत पड़ सकती है। इसमें नियमित से एक चौथाई या उससे बड़े साइज के ब्लड क्लॉट दिखाई दे सकते हैं। इस कारण महिलाओं को रोजमर्रा के काम में काफी परेशानी हो जाती है। उनके काम में तो बाधा आती ही है, साथ ही शारीरिक तौर पर कमजोरी भी हो जाती है। चलिए जानते हैं पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग होने का कारण और रोकथाम के उपाय।
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पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग होने पर क्या करें - फोटो : Pixabay
पीरियड्स में हैवी ब्लीडिंग से होने वाली समस्याएं

जिन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्त बहाव या हैवी ब्लीडिंग होती है, वह थकान महसूस करने के साथ ही लगातार पेट में दर्द और ऐंठन की समस्या से भी परेशान रहती है। ब्लड ज्यादा निकल जाने से एनीमिया की समस्या भी हो सकती है।
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पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग होने पर क्या करें - फोटो : iStock
हैवी ब्लीडिंग होने पर क्या करें?

-अगर आप मेनोरेजिया की समस्या से परेशान हैं तो डॉक्टर से बात करें। ताकि अंतर्निहित कारणों का पता चल सके।

-खान पान और जीवन शैली में सुधार करें।

-घरेलू नुस्खे, आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर पीरियड्स में हैवी ब्लीडिंग से राहत पाई जा सकती है।

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पीरिड्स में हैवी ब्लीडिंग की वजह

मासिक धर्म के दौरान ज्यादा रक्त निकल जाने की एक वजह शारीरिक और रोग संबंधी कारण हो सकते हैं। साथ ही हार्मोनल असंतुलन, आहार और जीवनशैली ठीक न होने से कारण भी पीरियड्स में अनियमितताएं आती है। ऐसे में अगर कोई महिला पीरियड में ज्यादा ब्लड आने से परेशान है तो उसकी वजह जानकर ऐसी परेशानी से बच सकती है।
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पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग होने पर क्या करें - फोटो : iStock
मसालेदार भोजन का अधिक सेवन

जो महिलाएं ज्यादा मसालेदार और फैटी भोजन करती हैं, उनमें पित्त दोष बढ़ता है। इससे शरीर में प्रोस्टाग्लैंडीन की संख्या बढ़ती है और यूट्रस अनुबंध हो सकता है। यूट्रस में संकुचन के कारण ऐंठन होने लगती है। ऐसे में पीरियड्स के दौरान फैटी या तेल मसालों वाले भोजन से बचना चाहिए। पीरियड्स में हाई मात्रा में सोडियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। ज्यादा सोडियम युक्त भोजन शरीर में सूजन बढ़ाता है।
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पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग होने पर क्या करें - फोटो : Pixabay
ज्यादा फास्टिंग करना 

अधिक समय तक व्रत करने से भी वात और पित्त दोष में बढ़ोतरी हो सकती है। महिलाएं अक्सर वजन कम करने के लिए बहुत समय तक भूखी रहती हैं। लेकिन हर किसी के लिए लंबे समय तक भूखा रहना फायदेमंद नहीं है। महिलाओं को अपने शरीर का ध्यान रखते हुए ही स्वस्थ जीवनशैली में ढलना चाहिए।
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पीरिड्स - फोटो : iStock
ज्यादा तनाव होना

पीरियड्स में अधिक रक्त आने की एक वजह तनाव भी है। जो महिलाएं अधिक तनाव में रहती हैं, वह मेनोरेजिया की समस्या से ग्रसित हो सकती है। योग और मेडिटेशन के जरिए आप तनाव कम कर सकते हैं। वजन कम करने के लिए ज्यादा एक्सरसाइज भी ब्लड फ्लो को बढ़ाती है। पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या को कम करने के लिए अपने शरीर पर अधिक दबाव न डालें और कम एक्सरसाइज करें। 
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नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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