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Measles: भारत में लाखों बच्चों पर मंडरा रहा है 'खसरा का खतरा'? WHO की इस रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

Thu, 23 Nov 2023 02:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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measles in india - फोटो : Amarujala
खसरा, छोटे बच्चों में होने वाला गंभीर संक्रामक रोग है, हालांकि वैक्सीनेशन और बचाव के उपायों में तेजी लाकर भारत में इस संक्रामक रोग की रफ्तार को काफी कम कर लिया गया है। अगस्त 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2017 से 2021 के बीच खसरे के मामलों में 62% की गिरावट आई है, यानी प्रति दस लाख की जनसंख्या पर ये मामले 10.4 से घटकर 4 रह गए थे। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट में देश में खतरे के जोखिमों को लेकर एक बार फिर से चिंता जताई गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में भारत में अनुमानित 11 लाख बच्चों को खसरे के टीके की पहली खुराक नहीं मिली है। जिससे भारत उन दस देशों में शामिल हो गया, जहां महामारी के बाद भी खसरे के टीकाकरण में सबसे ज्यादा अंतर है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि टीकाकरण में कमी के कारण भारत में इस संक्रामक रोग का जोखिम बढ़ सकता है, इस दिशा में गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
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बच्चों में खसरा की समस्या - फोटो : pixabay
टीकाकरण अभियान के बावजूद कम वैक्सीनेशन

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में भारत को उन 37 देशों में रखा गया है, जहां 2022 में 40,967 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। भारत सरकार इस संक्रामक बीमारी की रोकथाम के लिए विशेष टीकाकरण अभियान भी चला रही है, लेकिन बावजूद इसके भारत के खसरा टीकाकरण कवरेज में अंतराल बना हुआ है।

वैश्विक स्तर पर, महामारी के दौरान 2008 के बाद से खसरे का टीकाकरण अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जिसके परिणामस्वरूप 2022 में केस में 18% और इसके कारण मौत के मामलों में 43% की वृद्धि हुई। 
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खसरा का बीमारी
वैक्सीनेशन ने बचाई  5.7 करोड़ बच्चों की जान

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक विश्व स्तर पर, 1.3 लाख से अधिक बच्चों की खसरा की जटिलताओं के कारण हर साल मृत्यु हो जाती है। हालांकि, टीकाकरण अभियान से संक्रमण के कारण मृत्यु दर में 82% की कमी आई है। वैक्सीनेशन के कारण 2000 और 2022 के बीच, 22 साल में 5.7 करोड़ से अधिक बच्चों की जान बचाई गई है।

यहां गौर करने वाली बात ये है कि खसरा-रूबेला टीकाकरण भारत में बच्चों के लिए नियमित टीकाकरण का हिस्सा है, फिर भी इस दिशा में चूक हो रही है।

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खसरा के टीकाकरण से वंचित बच्चे - फोटो : pixabay
3.3 करोड़ बच्चे वैश्विक स्तर पर टीकाकरण से वंचित

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में टीकाकरण कवरेज में वृद्धि हुई थी, फिर भी वैश्विक स्तर पर 33 मिलियन (3.3 करोड़) बच्चे ऐसे हैं जो टीके की दोनों खुराक या दूसरी खुराक लेने से चूक गए थे। कम आय वाले देश, जहां खसरे से मृत्यु का जोखिम सबसे अधिक देखा जाता रहा है, वहां टीकाकरण दर केवल 66% पर सबसे कम बनी हुई है।

डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में कहा, वैक्सीनेशन की यह दर खतरे से बिल्कुल भी उबरने का संकेत नहीं देती है। इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है।
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खसरा के प्रकोप से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी - फोटो : istock
खसरा आखिर होता क्या है?

खसरा, बचपन में होने वाला संक्रमण है। ये बहुत तेजी से फैलता है और छोटे बच्चों के लिए गंभीर और घातक भी हो सकता है। खसरा के कारण त्वचा पर लाल, धब्बेदार दाने हो जाते हैं जो आमतौर पर पहले चेहरे पर और कान के पीछे दिखाई देते हैं, फिर नीचे छाती और पीठ तक और अंत में पैरों तक फैल जाते हैं। इसके साथ बुखार, सूखी खांसी, नाक बहने,  गला खराब होने और कुछ बच्चों में कंजंक्टिवाइटिस की भी समस्या देखी जाती रही है।

टीकाकरण इस संक्रामक रोग से बचाव का सबसे कारगर तरीका माना जाता है।



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स्रोत और संदर्भ
Global measles threat continues to grow as another year passes with millions of children unvaccinated


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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