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हेपेटाइटिस-सी: एक ब्लड टेस्ट से भी पकड़ में आ सकती है ये बीमारी, लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी

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हेपेटाइटिस-सी टेस्ट - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Tarun Bhardwaj

डॉ. तरुण भारद्वाज
डीएम, गैस्ट्रोइंटेरोलॉजिस्ट
भोपाल


लिवर यानी पाचन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा। यह छोटा सा अंग कई बार हमारी असावधानी से मुश्किल में पड़ जाता है। हेपेटाइटिस सी ऐसी ही एक बीमारी है जो कई तरीकों से संक्रमित कर सकती है। अच्छी बात यह है कि इस बीमारी का पता बहुत आसान जांच से चल सकता है और समय पर इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। लिवर पर बहुत बुरा प्रभाव डालने वाली यह बीमारी वायरस के कारण उपजती है। आंकड़ों की मानें तो भारत में यह बीमारी बहुत आम है। हर साल इस बीमारी के करीब 10 लाख केसेस हमारे देश में सामने आते हैं। ज्यादातर लोगों में शुरुआती स्तर पर तीव्र लक्षण नजर नहीं आते। उसपर लोग इलाज में भी देर कर देते हैं। इसके कारण मुश्किलें बढ़ जाती हैं। आइए जानते हैं कि किस तरह से फैल सकता है हेपेटाइटिस सी का संक्रमण? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हेपेटाइटिस सी का संक्रमण कई तरीकों से फैल सकता है। इसमें से कुछ हैं-
  • संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ाए जाने से
  • असुरक्षित यौन संबंधों से
  • नशे के इंजेक्शन लगाने वालों को
  • टैटू या बॉडी पियरसिंग से
  • बिना स्टरलाइज की गई निडिल्स से
  • संक्रमित गर्भवती से उसके बच्चे को
  • ऑटोइम्यून डिसीज के कारण (नॉन वायरल हेपेटाइटिस) 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
लक्षणों पर रखें ध्यान 
  • हालांकि इस समस्या के लक्षण अधिकांशतः एकदम सामने नहीं आते, लेकिन यदि उल्टी आने, नॉशिया, पेशाब और आंखों का रंग पीला होना, त्वचा का पीला पड़ना, पेट में ऊपर की तरफ दर्द होना जैसे लक्षण लगातार दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। अगर लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो लिवर को गंभीर नुकसान हो सकता है और यह समस्या क्रॉनिक हेपेटाइटिस का रूप ले सकती है। इसके बाद सिरोसिस होने की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए समय पर जांच करवाना जरूरी होता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जांच का आसान तरीका 
  • हेपेटाइटिस की जांच बहुत आसानी से एक ब्लड टेस्ट द्वारा हो सकती है। इसे ब्लड सैंपल देकर मात्र दो मिनट में परिणाम मिल सकते हैं। इस जांच को एचसीवी एंटीबॉडी टेस्ट कहा जाता है। इससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि क्या कोई व्यक्ति कभी हेपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित हुआ है। यह एक कारगर तरीका है। इसके अलावा हेपेटाइटिस सी की वजह से लिवर को हुए नुकसान का पता अल्ट्रासोनोग्राफी से लगाया जा सकता है। वहीं शुरुआती खराबी का फाइब्रोस्कैन से पता लगाया जा सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इलाज उपलब्ध है 
  • चिकित्सा क्षेत्र में हुए नए शोध और प्रयोगों ने आज हेपेटाइटिस के इलाज को लेकर भी बहुत आशाजनक परिणाम दिए हैं। भले ही हेपेटाइटिस सी के लिए अभी वैक्सीन नहीं है, लेकिन ऐसी दवाइयां हैं, जो हेपेटाइटिस को मरीज के शरीर से 90-100 प्रतिशत तक हटा सकती हैं और मरीज को स्वस्थ कर सकती हैं। जरूरी यह है कि समय पर और सही इलाज मिले। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ध्यान रखें 
  • रक्त चढ़वाते या रक्तदान करते समय ध्यान रखें, संक्रमित व्यक्ति का रेजर, तौलिया, बर्तन आदि इस्तेमाल करने से बचें, शारीरिक संबंधों के समय सावधानी रखें और गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की सलाह से मां का पूरा चेकअप करवाएं। साथ ही खानपान में भी सावधानी रखें। 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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