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खुशखबरी: मच्छरों से होने वाले इस रोग के लिए पहली वैक्सीन को मंजूरी, हर साल लाखों लोग होते हैं इसके शिकार

Fri, 10 Nov 2023 08:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मच्छरजनित रोग चिकनगुनिया - फोटो : iStock
मच्छरों के कारण होने वाले रोग के चलते हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। डेंगू, जीका वायरस जैसे रोगों के लिए अब तक कोई टीका और विशिष्ट उपचार भी नहीं है। इसके रोगियों को उपचार के तौर पर सहायक चिकित्सा दी जाती रही है। अब इस दिशा में बड़ी खबर सामने आ रही है। यूएस हेल्थ अथॉरिटी ने गुरुवार को चिकनगुनिया के लिए दुनिया के पहले टीके को मंजूरी दे दी है। यह वायरस संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है जिसे फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने दुनियाभर के लिए एक 'उभरता हुआ वैश्विक स्वास्थ्य खतरा' बताया है।

साल 2023 में और 30 सितंबर तक, दुनियाभर में लगभग 440,000 चिकनगुनिया के मामले दर्ज किए गए जिसमें से 350 से अधिक की मौत हो गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस टीके की मदद से वैश्विक स्तर पर होने वाले इस जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल चिकनगुनिया के टीके को 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए मंजूरी दी गई है।
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चिकनगुनिया के कारण होने का जोखिम - फोटो : istock
डेढ़ दशक में 50 लाख से अधिक हुए हैं चिकनगुनिया के शिकार

एफडीए की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक  यूरोप के वलनेवा कंपनी द्वारा विकसित वैक्सीन-इक्स्चिक, दुनियाभर में हर साल होने वाले चिकनगुनिया के जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है। अमेरिकी दवा नियामक द्वारा इक्स्चिक वैक्सीन को हरी झंडी मिलने से उन देशों में टीके के उन देशों में जल्द ही रोलआउट में तेजी आने की उम्मीद है, जहां वायरस सबसे अधिक प्रचलित है। एफडीए ने कहा, हालांकि, चिकनगुनिया वायरस दुनिया के कई देशों में फैल गया है, जिससे बीमारी के वैश्विक प्रसार में वृद्धि हुई है। पिछले 15 वर्षों में 5 मिलियन से अधिक मामले सामने आए हैं।
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आखिर क्यों कुछ लोगों को ही ज्यादा काटते हैं मच्छर - फोटो : iStock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

एफडीए के वरिष्ठ अधिकारी पीटर मार्क्स कहते हैं, "चिकनगुनिया वायरस के संक्रमण से गंभीर बीमारी और लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, खासकर वृद्ध वयस्कों और अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों वाले व्यक्तियों के लिए यह रोग गंभीर जटिलताओं वाला हो सकता है। टीके की मंजूरी, इस रोग को लेकर चिकित्सा आवश्यकता को संबोधित करती है। इस रोग के सीमित उपचार विकल्पों के कारण पिछले कुछ दशकों में इसका खतरा बढ़ा हुआ देखा गया है।  

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चिकनगुनिया वायरस के लिए टीके - फोटो : Pixabay
कितनी कारगर है ये वैक्सीन?

विज्ञप्ति के मुताबिक वैक्सीन को एक खुराक में इंजेक्ट किया जाएगा। टीके में चिकनगुनिया वायरस का जीवित पर कमजोर वायरस होता है, ये शरीर को इस रोग के प्रति एंटीबॉडीज विकसित करने में मदद करेगा, जिससे संक्रमण की स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आसानी से रोगजनकों की पहचान कर उससे मुकाबला कर सके।

उत्तरी अमेरिका में 3,500 लोगों पर इसके दो क्लिनिकल परीक्षण किए गए, जिसमें ये रोग के खतरे को कम करने में कारगर पाई गई है। वैक्सीन लेने वाले लोगों में सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, बुखार और मतली जैसे हल्के दुष्प्रभाव रिपोर्ट किए गए।
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चिकनगुनिया के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : istock
चिकनगुनिया और इसके कारण होने वाली समस्याएं

गौरतलब है कि चिकनगुनिया होने पर रोगी को बुखार और गंभीर जोड़ों में दर्द की समस्या होती है। ये जोड़ों में सूजन या शरीर पर दाने-चकत्ते जैसी समस्याओं का भी कारण बन सकती है। कुछ लोगों में रोग से ठीक होने के लंबे समय बाद तक भी कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं देखी जाती रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस टीके से हर साल चिकनगुनिया के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।



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स्रोत और संदर्भ
FDA Approves First Vaccine to Prevent Disease Caused by Chikungunya Virus

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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