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ICMR ने चेताया: युवाओं में बढ़ती ये आदत सेहत के लिए बहुत हानिकारक, मोटापा सहित कई रोगों का हो सकता है खतरा

Sat, 11 May 2024 12:45 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रोटीन की जरूरत - फोटो : freepik.com
बलिष्ठ मांसपेशियों और बेहतर शारीरिक बनावट की इच्छा रखने वाले युवाओं के बीच बढ़ती प्रोटीन सप्लीमेंट्स की मांग को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने हाल ही में जारी आहार संबंधी दिशानिर्देशों में प्रोटीन सप्लीमेंट्स के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर चेताया है। विशेषज्ञों ने कहा शरीर बनाने की चाहत में युवा प्रोटीन पाउडर के नाम पर जाने-अनजाने शरीर के लिए हानिकारक चीजों का सेवन कर रहे हैं। इसके कारण फिटनेस तो ठीक होता नहीं बल्कि डायबिटीज, हृदय रोग और मोटापे जैसी बीमारियों का जोखिम जरूर बढ़ जाता है। 

हालिया गाइडलाइंस में आईसीएमआर ने आहार संबंधी गड़बड़ी को देश में 56 फीसदी बीमारियों का प्रमुख कारण बताया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा तेजी से बढ़ते मोटापे और मधुमेह जैसी नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) से बचाव के लिए आहार में सुधार की मदद से लाभ पाया जा सकता है। एनसीडी उन बीमारियों को कहा जाता है जिनके एक से दूसरे में संचार का खतरा नहीं होता है। इसी क्रम में विशेषज्ञों ने प्रोटीन सप्लीमेंट्स से भी दूरी बनाने की सलाह दी है।

आइए जानते हैं कि प्रोटीन सप्लीमेंट्स को क्यों इतना हानिकारक माना जाता है और इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
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प्रोटीन पाउडर - फोटो : freepik.com
पहले जान लीजिए क्या होते हैं प्रोटीन सप्लीमेंट्स?

कई अध्ययनों में इस बात को लेकर चिंता जताई जाती रही है कि देश के अधिकतर लोगों को शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन नहीं मिल पाता है। प्रोटीन मांसपेशियों, हड्डियों की मजबूती और शरीर के कई कार्यों के लिए आवश्यक है। जिम जाने वाले-व्यायाम करने वाले लोगों में प्रोटीन की जरूरत भी अधिक होती है। इन्हीं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बाजार में प्रोटीन पाउडर बेचे जा रहे हैं जिनका दावा है कि इससे आप प्रोटीन की दैनिक जरूरतों की आसानी से पूर्ति कर सकते हैं।
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प्रोटीन सप्लीमेंट्स - फोटो : freepik.com
फिर इन्हें क्यों माना जाता है नुकसानदायक?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं बाजार में बिक रहे प्रोटीन पाउडर में अतिरिक्त शर्करा और कृत्रिम स्वाद के लिए रासायनिक फ्लेवर मिलाया जाता है। नतीजतन हर स्कूप के साथ हमारे शरीर में अधिक मात्रा में  शर्करा जा रही होती है। शुगर और कैलोरी की अधिकता को वजन बढ़ाने और कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का कारण माना जाता है। 

वजन और ब्लड शुगर बढ़ने की स्थिति समय के साथ हृदय रोगों के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। यही कारण है कि आहार विशेषज्ञ प्रोटीन सप्लीमेंट्स की जगह प्राकृतिक स्रोतों से प्रोटीन प्राप्त करने की सलाह देते हैं।

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पाचन से संबंधित विकारों का खतरा - फोटो : istock
पाचन-किडनी के लिए ये हानिकारक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि प्रोटीन पाउडर के अधिक सेवन के कारण पाचन से संबंधित दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोगों को लैक्टोज को पचाने में समस्या होती है, जिससे उनमें पेट में सूजन, गैस, पेट में ऐंठन और दस्त जैसे लक्षण हो सकते हैं।

इतना ही नहीं उच्च-प्रोटीन आहार से आपके किडनी की आपके रक्त को फिल्टर करने की क्षमता पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि लंबे समय तक अधिक मात्रा में अगर आप हाई प्रोटीन वाली चीजों का सेवन करते हैं तो इससे किडनी से संबंधित समस्याओं के बढ़ने का भी खतरा हो सकता है।
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प्रोटीन वाले आहार - फोटो : istock
क्या है आहार विशेषज्ञों की सलाह?

पुणे स्थित आहार विशेषज्ञ प्रियंका सिंह ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि प्रोटीन पाउडर की जगह पर प्राकृतिक स्रोतों से प्रोटीन प्राप्त करना सुरक्षित होता है। शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के आहार में कई ऐसी चीजें हैं जिनसे आप दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते है। वयस्कों के लिए शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम 0.8 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, जिस व्यक्ति का वजन 75 किलोग्राम है, उसे प्रतिदिन 60 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। प्रोटीन के अधिक सेवन के कारण भी कई प्रकार के दुष्प्रभावों का जोखिम हो सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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