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Covishield: भारत की कितनी आबादी को लगी कोविशील्ड वैक्सीन, कितने लोगों में रिपोर्ट किए गए दुष्प्रभाव?

Sat, 11 May 2024 11:07 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोविशील्ड वैक्सीन - फोटो : istock
कोविड की एस्ट्राजेनेका वैक्सीन से होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर दुनियाभर में चर्चा हो रही है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में वैक्सीन निर्माता कंपनी ने ब्रिटेन की कोर्ट में स्वीकार किया था कि टीकों के कारण दुर्लभ स्थितियों में थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस) होने का जोखिम हो सकता है। टीटीएस के कारण रक्त के थक्के बनने और खून में प्लेटलेट्स की मात्रा कम होने जैसी समस्याओं का जोखिम रहता है। इन दुष्प्रभावों को लेकर भारत में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोविशील्ड ले चुके लोगों में कई तरह का डर देखा जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है ये दुष्प्रभाव काफी दुर्लभ हैं, इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। 10 लाख में से 6-10 लोगों में इस तरह के जोखिम हो सकते हैं।

वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स की खबरों के बीच डॉक्टरों के एक समूह ने गुरुवार को कोविशील्ड वैक्सीन की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की। डॉक्टरों की टीम ने सरकार से सभी कोविड वैक्सीन के पीछे के वैज्ञानिक तथ्यों की समीक्षा करने और इसके व्यावसायीकरण का दोबारा ऑडिट करने की मांग की है। 

भारत में कोविशील्ड वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए एस्ट्राजेनेका की साझेदार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने बताया कि उसने दिसंबर 2021 में ही वैक्सीन का उत्पादन बंद कर दिया है। इतना ही नहीं कंपनी ने ये भी कहा है कि हमने 2021 में ही टीकों से होने वाले दुष्प्रभावों को खुलासा कर दिया था।
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वैक्सीन के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Istock
टीकों के दुष्प्रभावों को लेकर पहले ही कर दिया था आगाह

एसआईआई के एक प्रवक्ता ने कहा कि हमने 2021 में ही पैकेजिंग इंसर्ट में वैक्सीन के कारण होने वाले टीटीएस सहित अन्य सभी दुष्प्रभावों के बारे में आगाह कर दिया था। साल 2021 के बाद से कोविशील्ड वैक्सीन का उत्पादन भी बंद कर दिया गया है। 

मीडिया रिपोर्ट्स में एस्ट्राजेनेका के प्रवक्ता ने बताया चूंकि कोरोना महामारी के दौरान कई प्रकार के कोविड-19 टीके विकसित किए गए और वायरस में म्यूटेशन के साथ इसको भी अपेडट किया गया है। नए टीकों के बाजार में आने के कारण पुरानी वैक्सीन की मांग में गिरावट आई है, जिस वजह से अब इनकी निर्माण या आपूर्ति नहीं की जा रही है।
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भारत में कोविड टीकाकरण - फोटो : istock
भारत में 79% लोगों ने ली कोविड वैक्सीन

भारत में कोविड वैक्सीनेशन पर नजर डालें तो पता चलता है कि टीकाकरण अभियान के दौरान भारत में दी गई 220 करोड़ खुराकों में से 79% से अधिक कोविशील्ड की थीं। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि वैक्सीनेशन के कारण देश में टीटीएस के 36 ज्ञात मामले सामने आए और 18 लोगों की मौत हो गई थी। टीटीएस के लगभग सभी मामले 2021 से संबंधित हैं, जो भारत में टीकाकरण का पहला वर्ष था।

7 मई, 2024 तक भारत में लोगों को टीके की 220 करोड़ से अधिक डोज दी जा चुकी हैं। देश में जो टीके दिए गए हैं उनमें कोविशील्ड, कोवैक्सिन, स्पुतनिक वी, जेमकोवैक, कॉर्बेवैक्स, कोवोवैक्स और इनकोवैक शामिल हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 174 करोड़ से ज्यादा टीके के डोज कोविशील्ड के लगे हैं। दूसरे स्थान पर कोवैक्सिन है जिसके 36.39 करोड़ से ज्यादा टीके के डोज के लगे हैं। तीसरे स्थान पर कॉर्बेवैक्स है, जिसके 7.38 करोड़ से ज्यादा टीके के डोज के लगे हैं। 

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कोविशील्ड वैक्सीन - फोटो : Istock
कोविशील्ड वैक्सीन ले चुके लोग डरें नहीं

कोविशील्ड वैक्सीन के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि वैक्सीन से होने वाले दुष्प्रभाव काफी दुर्लभ हैं, 10 लाख लोगों में 7-10 में इस तरह के दुष्प्रभाव हो सकते हैं इसलिए टीकाकरण करा चुके लोगों को डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। टीकाकरण और दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव आमतौर पर कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों में ही दिखने लगते हैं। चूंकि ज्यादातर लोगों को वैक्सीन ले चुके दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, ऐसे में अब टीके से होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित होने का जरूरत नहीं है।
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रक्त को पतला करने वाली दवाएं - फोटो : istock
बिना डॉक्टरी सलाह के ब्लड थिनर के हो सकते हैं गंभीर नुकसान
 
इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। खबरों के मुताबिक वैक्सीन के दुष्प्रभावों के डर से बचने के लिए कई लोगों ने खून को पतला करने वाली दवाएं लेनी शुरू कर दी हैं।

इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बिना डॉक्टरी सलाह के ब्लड थिनर जैसी दवाएं गंभीर समस्याकारक हो सकती हैं। अगर आप खुद से या बिना डॉक्टरी सलाह के रक्त को पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं तो इसके कई गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ये गंभीर रक्तस्राव का कारण बन सकती है।

ये भी पढ़िए- टीकों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए अब लोग ले रहे हैं ब्लड थिनर


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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