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सलाह: मानसून की बीमारियों के साथ कोविड से बचाव के लिए पीजिए ऐसा काढ़ा, डायबिटीज में भी फायदेमंद

Tue, 10 Aug 2021 07:07 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मानसून में काढ़े का सेवन - फोटो : Social media
Medically reviewed by-
आचार्य मनीष
(आयुर्वेदाचार्य)
शुद्धी आयुर्वेद, दिल्ली


कोरोना महामारी से सुरक्षित रहने के लिए बचाव को ही विशेषज्ञ सबसे बेहतर उपाय मानते हैं। कोरोना से बचाव के लिए सभी लोगों को मास्क लगाने, हाथों को धोते रहने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर न जाने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक भले ही इस समय देश में कोरोना की रफ्तार थम गई है लेकिन बचाव के नियमों के पालन में कोई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। चूंकि कोरोना की तीसरी लहर को लेकर आशंका जताई जा रही है, ऐसे में लोगों को लगातार सुरक्षा के उपायों के साथ-साथ शरीर की प्रतिरक्षा को बढ़ाने वाले उपाय भी करते रहने चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के खतरे के साथ-साथ इस समय देश में मानसून से संबंधित बीमारियों का खतरा भी अधिक है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए यह मौसम गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। ऐसे में सभी लोगों को अपने दैनिक आहार में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए जो मानसून की बीमारियों से सुरक्षा देने के साथ आपको कोरोना संक्रमण के खतरे से भी बचा सकें। कोरोना की दूसरी लहर में काढ़े को इस तरह की समस्याओं को ठीक करने के लिए काफी ज्यादा प्रयोग में लाया गया था। आइए आगे की स्लाइडों में मौसम के अनुरूप ऐसे काढ़े के बारे में जानते हैं जो मानसून की बीमारियों के खतरे से दूर रखने के साथ इम्यूनिटी को मजबूती देने में सहायक हो सकती है।
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तुलसी और हल्दी का काढ़ा बेहद फायदेमंद - फोटो : istock
तुलसी और हल्दी का काढ़ा सबसे फायदेमंद
आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक मौसमी बीमारियों से सुरक्षा देने में तुलसी और हल्दी दो सबसे उपयोगी और असदार औषधियां हैं। इन औषधियों से बना हुआ काढ़ा न सिर्फ शरीर को तमाम तरह के संक्रमण से सुरक्षित रख सकता है साथ ही इसे इम्यूनिटी के लिए भी काफी लाभदायक माना जाता है। काढ़ा तैयार करने के लिए आधा चम्मच हल्दी, 8-12 तुलसी के पत्ते, 2 बड़े चम्मच शहद, 3-4 लौंग और थोड़ी सी दालचीनी ले लें। इन औषधियों से बना काढ़ा शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है।
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मानसून की बीमारियों से दूर रखता है काढ़ा - फोटो : Pixabay
तुलसी और हल्दी का काढ़ा कैसे बनाएं?
तुलसी और हल्दी का काढ़ा बनाने के लिए सबसे पहले पैन में एक गिलास पानी डालकर गर्म करें। अब इसमें हल्दी पाउडर, तुलसी के पत्ते, लौंग और दालचीनी डालें। मिश्रण को 15 मिनट तक उबलने दें। अब इस मिश्रण को छान लें, स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसमें थोड़ा सा शहद मिला सकते हैं। प्रतिरक्षा में सुधार करने और मानसून की तमाम बीमारियों से मुकाबले के लिए शरीर को मजबूत बनाने के लिए इस कढ़े का सेवन दिन में एक बार कर सकते हैं।

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कई रोगों से बचा सकता है काढ़ा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
कई रोगों में फायदेमंद हो सकता है यह पेय
आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक तमाम औषधियों के मिश्रण से बना यह पेय कई रोगों के निवारण में फायदेमंद हो सकता है। मधुमेह के रोगी रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रण करने के लिए इस पेय का सेवन कर सकते हैं। तुलसी और हल्दी के औषधीय गुण शरीर के विषाक्त पदार्थों को कम करने के साथ प्रतिरक्षा में सुधार करने में सहायक हो सकते हैं। इस काढ़े का सेवन
कब्ज और दस्त जैसी समस्याओं को भी ठीक कर सकता है। इतना ही नहीं मौसम बदलने के कारण सर्दी और गले की खराश से राहत दिलाने में भी इस काढ़े की औषधियों को कारगर माना जाता है।
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जड़ी-बूटियों से तैयार काढ़े के अनेकों लाभ (सांकेतिक) - फोटो : Social media
कोरोना में काढ़े के सेवन के लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, काढ़े का सेवन प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में काफी मददगार हो सकता है। चूंकि इसमें तमाम तरह की जड़ी-बूटियों और मसालों को प्रयोग में लाया जाता है जोकि स्वाभाविक रूप से एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होती हैं, ऐसे में यह प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है, ऐसे में काढ़े का सेवन प्रतिरक्षा को बढ़ाने के साथ कोरोना से सुरक्षा देने में भी सहायक हो सकता है। हालांकि, इसका ज़्यादा सेवन करना शरीर के लिए कई तरह से नुकसानदायक भी हो सकता है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखें।


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नोट: यह लेख प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य आचार्य मनीष के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आचार्य मनीष, शुद्धी आयुर्वेद के संस्थापक हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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