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कोरोना मरीजों में अब ग्रीन फंगस का खतरा: ऐसे लोग रहें सावधान, इन पांच लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Wed, 16 Jun 2021 01:43 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना मरीजों में ग्रीन फंगस का खतरा - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

डॉ. राजन गांधी

जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष


पिछले कुछ दिनों से कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों में हो रहे फंगल संक्रमण को लेकर खूब चर्चा हो रही है। पहले ब्लैक फंगस से संक्रमण के मामले सामने आए थे, उसके बाद व्हाइट और फिर येलो फंगस के मामले सामने आए। अब ग्रीन फंगस के भी मामले सामने आने लगे हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर में एक शख्स ग्रीन फंगस से संक्रमित मिला है। बताया जा रहा है कि कोरोना से ठीक होने के बाद उस शख्स को घर भेज दिया गया था, लेकिन फिर पोस्ट कोविड लक्षणों की वजह से उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस दौरान उसके ग्रीन फंगस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज के फेफड़ों में 90 फीसदी संक्रमण हो गया था, जिसके बाद उसे इलाज के लिए मुंबई भेजा गया। फिलहाल हिंदुजा अस्पताल में मरीज का इलाज चल रहा है। आइए जानते हैं कि अब ये ग्रीन फंगस कौन सी नई बला है और इसके लक्षण क्या हो सकते हैं? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विशेषज्ञ कहते हैं कि एसपरजिलस फंगस को ही सामान्य भाषा में ग्रीन फंगस कहा जाता है। एसपरजिलस कई तरह की होती है। ये शरीर पर काली, नीली हरी, पीली हरी और भूरे रंग की पाई जाती है। एसपरजिलस फंगल संक्रमण भी फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। इसमें फेफड़ों में मवाद भर जाता है, जो इसे खतरनाक बना देता है। दरअसल, यह फंगस फेफड़ों को काफी तेजी से संक्रमित करता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ग्रीन फंगस का खतरा किसे ज्यादा? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि जिन लोगों को पहले से कोई एलर्जी होती है, ग्रीन फंगस से संक्रमित होने का खतरा उनमें ज्यादा होता है। इसमें भी अगर संक्रमित होने वाले मरीज को निमोनिया हो जाए या फंगल बॉल बन जाए तो ये खतरनाक और जानलेवा हो सकता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ग्रीन फंगस के लक्षण क्या हैं? 
  • घरघराहट 
  • सांस लेने में कठिनाई 
  • बुखार (दुर्लभ मामलों में) 
  • अगर संक्रमण गंभीर है, तो मरीज को सीने में दर्द या खांसी के साथ खून भी आ सकता है 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विशेषज्ञ कहते हैं कि वैसे तो सभी तरह की फंगस में एक बात समान पाई जाती है और वो ये है कि अगर प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर पड़ जाता है, तो फंगल संक्रमण शरीर पर हमला कर देता है। स्वस्थ और अच्छी इम्यूनिटी वाले लोगों में फंगल संक्रमण नहीं होता। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉक्टरों के मुताबिक, फंगल संक्रमण का खतरा उन लोगों में भी ज्यादा होता है, जिनका कोई ट्रांसप्लांट किया गया है, जैसे- किडनी, लिवर आदि। इसके अलावा कैंसर के मरीज, जिनकी कीमोथेरेपी चल रही है या जो डायलिसिस पर हों, उन्हें भी किसी तरह के फंगल संक्रमण का खतरा अधिक होता है, क्योंकि उनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। इसलिए सभी लोगों को इससे घबराने और डरने की जरूरत नहीं है। 

नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।  
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