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सावधान: आंखों से लेकर प्रजनन क्षमता तक, ज्यादा कॉफी पीने से शरीर को हो सकते हैं कई गंभीर नुकसान

Fri, 06 Aug 2021 07:39 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ज्यादा कॉफी पीने के सेहत को नुकसान (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
कॉफी दुनियाभर में सबसे ज्यादा पसंदीदा पेय पदार्थ में से एक है। कई लोगों के सुबह की नींद बिना कॉफी के नहीं खुलती है, तो कुछ लोगों को काम के दौरान ऊर्जावान बने रहने के लिए कॉफी पीने की जरूरत होती है। क्या आप भी कॉफी के इतने ही शौकीन हैं, तो आप एक दिन में कितने कप कॉफी पी लेते हैं? एक-दो, चार-पांच? अगर आपके लिए यह संख्या बढ़ती ही जा रही है तो सावधान हो जाइए, ज्यादा मात्रा में कॉफी पीना सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि कम मात्रा में कॉफी पीने से जितने लाभ हैं, इसका सेवन बढ़ा देने से उससे कहीं अधिक नुकसान हो सकते हैं।
कई अध्ययनों के दौरान वैज्ञानिक बताते हैं कि कॉफी का अधिक सेवन स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकता है। शरीर में कैफीन की मात्रा अधिक हो जाने पर आपको भ्रम, उल्टी और कई अन्य गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा यह शरीर के कई अंगों के लिए भी गंभीर क्षति का कारण बन सकती है। तो अब से ज्यादा मात्रा में कॉफी पीने से पहले इससे होने से नुकसान के बारे में जान लीजिए जिससे आप इनसे सुरक्षित रह सकें।
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ज्यादा कॉफी पीने से हो सकती है आंखों की समस्या - फोटो : pixa
अधिक कॉफी पीने से ग्लूकोमा का खतरा
माउथ सिनाई स्थित आईकन स्कूल ऑफ मेडिसिन के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि जिन लोगों को आनुवंशिक रूप से आंखों की बीमारियों की आशंका अधिक होती है, उनके लिए रोजाना अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन ग्लूकोमा का खतरा उत्पन्न कर सकता है। आनुवांशिक रूप से ज्यादा खतरा वाले लोगों की तुलना में अन्य लोगों में प्रतिदिन 321 मिलीग्राम से अधिक कैफीन का सेवन 3.9 गुना तक ग्लूकोमा का खतरा बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक आंखों के अंदर एक प्रकार के द्रव (एक्वीस ह्यूमर) के निर्माण के कारण आंखों पर दवाब बढ़ जाता है। सामान्य तौर पर यह द्रव ट्रैब्युलर मेशवर्क नामक एक ऊतक के माध्यम से आंखों से बाहर निकलता है। द्रव का अधिक उत्पादन या इसके आंख से बाहर निकलने की प्रक्रिया में बाधा के कारण आंखों में दबाव अधिक हो जाता है।
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मानसिक रोगों का कारण बन सकती है अधिक कॉफी - फोटो : Pixabay
मानसिक रोगों का भी कारण बन सकती है अधिक कैफीन
'न्यूट्रीशन न्यूरोसाइंस' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, लोगों को कॉफी के सेवन को प्रतिबंधित करने पर ध्यान देना चाहिए। ज्यादा मात्रा में कॉफी पीने से डेमेंशिया के साथ स्ट्रोक का भी खतरा हो सकता है। 37 से 73 वर्ष की आयु वाले 17,702 प्रतिभागियों पर वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया। इनमें से 53 प्रतिशत प्रतिभागियों में डेमेंशिया का खतरा अधिक पाया गया, इन लोगों के कॉफी का सेवन एक दिन में 6 कप से अधिक था। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की दिक्कतों से बचे रहने के लिए सभी लोगों को रोजाना कम मात्रा में ही कॉफी का सेवन करना चाहिए।

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प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती है ज्यादा कॉफी - फोटो : Social media
प्रजनन पर भी डाल सकता है असर
कॉफी भले ही रोजाना के काम से होने वाली थकान को दूर करने का बेहतर उपाय हो सकती है लेकिन इसका बहुत ज्यादा सेवन नुकसानदायक होता है। यदि आप एक दिन में तीन से चार कप कॉफी पीते हैं तो सावधान हो जाएं, यह आपकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी का अत्यधिक सेवन शुक्राणु उत्पादन को बाधित कर सकता है। महिलाओं के लिए परिणाम और भी गंभीर हैं। कॉफी का ज्यादा सेवन गर्भपात के खतरे को भी दोगुना कर सकता है।
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दिन में न पिएं ज्यादा मात्रा में कॉफी - फोटो : Pixabay
कितनी मात्रा में कॉफी पीने से नहीं है नुकसान
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के सुझावों के अनुसार अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए एक दिन में 400 मिलीग्राम कैफीन के सेवन को सुरक्षित माना जा सकता है। यह दो-तीन कप कॉफी या दो एनर्जी ड्रिंक के बराबर की मात्रा है। ध्यान रखें कि हर पेय पदार्थ में कैफीन की मात्रा भिन्न हो सकती है, इसलिए उसे ध्यान में रखें। वहीं अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार सिर्फ एक चम्मच पाउडर कैफीन लगभग 28 कप कॉफी के बराबर हो सकती है। कैफीन का इतना उच्च स्तर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और संभवतः मृत्यु का कारण भी बन सकता है।



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नोट: यह लेख तमाम मेडिकल वेबसाइट से एकत्रित अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है। कॉफी से होने वाले और अधिक नुकसान के बारे में जानने के लिए चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

 
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