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एक नजर: 75 साल में देश को किन बीमारियों ने किया परेशान, किन पर मिली सफलता?

Sun, 15 Aug 2021 12:01 AM IST
Abhilash Srivastava अभिलाष श्रीवास्तव
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भारत में बीमारियां (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
साल 2021 में भारत आजादी की 75वीं सालगिरह मना रहा है। आजादी के बाद करीब सात दशकों से अधिक समय में देश में तमाम परिवर्तन देखने को मिले। व्यापार, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे क्षेत्र में देश में लगातार उन्नति की ही। पंचवर्षीय योजनाओं में रखे लक्ष्य को पूरा करने और देश को समृद्ध तथा खुशहाल बनाने के लिए तमाम सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर अथक प्रयास किए। आजादी की 75वीं सालगिरह के इस समय में देश कोरोना जैसी बड़ी महामारी का सामना कर रहा है, आइए इस लेख में जानते हैं कि साल 1947 में आजादी मिलने से लेकर अब तक कोरोना जैसी और किन बीमारियों ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा दबाव डाला? उन बीमारियों से निपटने में भारत अब तक कितना सफल हो पाया है?
आंकड़ों पर नजर डालें तो कोरोना की तरह ही चेचक, पोलियो, काली खांसी, टीबी जैसी कई बीमारियों का सामना देश ने इस 75 वर्षों में किया। कुछ बीमारियों पर लगभग जीत हासिल कर ली है, कुछ पर प्रयास जारी है। आगे की स्लाइडों में जानते हैं, 75 साल में देश को किन बीमारियों ने परेशान किया, किनका इलाज मिला?
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टीबी की बीमारी (सांकेतिक) - फोटो : Social media
टीबी
बीमारियों की सूची में सबसे पहले चर्चा करते हैं टीबी की। माइको ट्यूबरक्युलोसिस बैक्टीरिया के कारण होने वाली यह बीमारी फेफड़ों को बुरी तरह से क्षति पहुंचाती है। भारत सरकार ने साल 2025 तक देश को टीबी से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 'ग्लोबल ट्यूबरकुलोसिस रिपोर्ट 2020' के अनुसार साल 2019 में दुनियाभर के 26 फीसदी टीबी के मरीजों का आंकड़ा अकेले भारत से ही सामने आया था। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी 'एनुअल टीबी रिपोर्ट 2021' के मुताबिक, साल 2020 में देश में टीबी के 18.05 लाख, 2019 में 24.03 और 2018 में 21.56 लाख मरीज सामने आए थे। क्या सरकार 2025 तक देश के टीबी से मुक्त बना पाएगी? यह देखने वाली बात होगी। 
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चेचक की बीमारी - फोटो : pixabay
चेचक के मामले
चेचक के मामले भारत के लिए बड़ी चुनौती साबित हुए। आजादी के दशक में देश चेचक की समस्या से बुरी तरह से जूझ रहा था। यह बीमारी लोगों की जान ले रही थी। साल 1949 में चेचक के खिलाफ देश में टीकाकरण की शुरुआत की गई। चेचक से छुटकारा पाने और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए साल 1962 में राष्ट्रीय चेचक उन्मूलन कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस संक्रमण को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं और योजनाओं पर जोर दिया गया। साल 1977 में भारत को चेचक मुक्त घोषित किया गया। 

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पोलियो मुक्त भारत - फोटो : pixabay
पोलियो की बीमारी
आजादी के दशक में भारत पोलियो की समस्या से भी बेहद परेशान था। भारत ने इस बीमारी से मुकाबले के लिए भी हर संभव कोशिश की। साल 1970 में पहली बार देश में ओरल पोलियो वैक्सीन तैयार की गई। 1995 में भारत सरकार देशभर में तीन साल तक की उम्र के बच्चों को पोलियो टीकाकरण अभियान के दायरे में लेकर आई। व्यापक रूप से देश के हर हिस्सों में बच्चों को पोलियो की खुराक देने की शुरुआत हुई। साल 2011 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा ज़िले में पोलियो का टाइप-1 मामला सामने आया, भारत में पोलियो का यह आखिरी केस था। इसके बाद साल 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत को पोलियो मुक्त घोषित कर दिया।
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हैजा के कारण देश में हुई थी कई हजारों मौत (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
हैजा की महामारी
ब्रिटिश काल से लेकर आजादी के बाद तक भारत में कई बार हैजा की बीमारी ने खूब उत्पात मचाया। साल 1817 से 1824 के बीच पहली बार यह महामारी कलकत्ता में फैली। इस महामारी में कई हजार लोगों की मौत हो गई। कोलकाता में खराब जल संचय प्रणाली के कारण इस शहर में हैजा की महामारी का असर ज्यादा देखने को मिलता था। 1960 के दशक में एक बार फिर से कई शहरों में हैजा के मामले तेजी से बढ़ने लगे। भारत ने इस समस्या से निपटने के लिए वृहद योजनाओं पर काम किया। इसी का परिणाम रहा कि साल 2007 हैजा का आखिरी मामला सामने आया।


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नोट: यह लेख तमाम मीडिया रिपोर्टस और सरकारी संस्थानों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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