फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Eye Problem: शुगर नहीं रहता है कंट्रोल तो अंधेपन का हो सकता है खतरा, जानिए इसका कारण और बचाव के तरीके

Sun, 20 Oct 2024 06:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
डायबिटीज में आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com
ब्लड शुगर का सामान्य से अधिक बने रहना सेहत के लिए कई मामलों में गंभीर हो सकता है। हाई शुगर लेवल के कारण टाइप-2 डायबिटीज की समस्या होती है, जिसे वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती क्रोनिक बीमारी के रूप में जाना जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप अपने शुगर को ठीक तरीके से कंट्रोल नहीं रखते हैं तो इसका कई अंगों पर नकारात्मक असर हो सकता है। यही कारण है कि डायबिटीज के शिकार लोगों में हृदय रोग, किडनी की बीमारी, पैरों में घाव होने और आंखों की समस्याओं का खतरा ज्यादा देखा जाता रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डायबिटीज रोगियों में आंखों की बीमारी, कम दिखाई देने जैसी समस्याओं का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। समय के साथ, मधुमेह की बीमारी आंखों की तंत्रिकाओं, रेटिना को नुकसान पहुंचाने लगती है। इससे अंधेपन का भी खतरा हो सकता है। 
विज्ञापन

2 of 5
डायबिटीज के कारण आंखों की दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज में आंखों की समस्याएं

डायबिटीज ऐसी बीमारी है जिसमें आपके रक्त में ग्लूकोज या शुगर का स्तर बहुत अधिक हो जाता है। हमारे शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की आवश्यकता होती है। इंसुलिन नामक हार्मोन ग्लूकोज को आपकी कोशिकाओं में जाने में मदद करता है। टाइप-2 डायबिटीज की स्थिति में आपका शरीर इंसुलिन का निर्माण या उपयोग ठीक से नहीं करता है। पर्याप्त इंसुलिन के बिना खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। ये स्थिति आंखों की रक्त वाहिकाओं और लेंस को नुकसान पहुंचाने वाली मानी जाती है। 

डायबिटीज में आंखों की रक्त वाहिकाओं को होने वाले नुकसान को डायबिटिक रेटिनोपैथी के नाम से जाना जाता है। 
विज्ञापन

3 of 5
गर्भावस्था में डायबिटीज - फोटो : Freepik.com
गर्भावस्था के दौरान बरतें विशेष सावधानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की समस्या (गर्भावस्था मधुमेह) या गर्भवती होने से पहले मधुमेह होने पर डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा और भी बढ़ जाता है। यदि आप गर्भवती हैं और डायबिटीज की भी समस्या है तो गर्भावस्था के दौरान नेत्र चिकित्सक से मिलकर अपने जोखिमों की जांच जरूर करा लें।

गर्भावस्था के दौरान शुगर को कंट्रोल रखना और भी आवश्यक हो जाता है क्योंकि हाई शुगर के कारण कई अन्य तरह की जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।

4 of 5
आंखों की दिक्कतें - फोटो : freepik.com
डायबिटिक रेटिनोपैथी में क्या दिक्कतें होती हैं?

डायबिटिक रेटिनोपैथी वयस्कों में अंधेपन का प्रमुख कारण है। यह रेटिना में मौजूद रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है। इसके कारण रक्त वाहिकाओं में सूजन या आंख में तरल पदार्थ का रिसाव हो सकता है। 

शुरुआती चरणों में, मधुमेह के कारण होने वाली आंखों की समस्याओं में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते हैं। इसलिए नियमित रूप से आंखों की जांच कराना बहुत जरूरी है, भले ही आपको लगे कि आंखें स्वस्थ हैं। डायबिटीज रोगियों को कुछ लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है।
  • आंखों में धब्बे या गहरे रंग की लहरदार रेखाएं दिखना।
  • देखते समय ऐसे लगना जैसे कुछ काली छाया हो।
  • कम दिखाई देना।
  • आंखों में दर्द या लालिमा की दिक्कत बनी रहना।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आंखों की देखभाल कैसे करें? - फोटो : Freepik.com
कैसे करें इन समस्याओं से बचाव?

मधुमेह में आंखों को होने वाले नुकसान से बचे रहने के लिए अपने ब्लड शुगर को अच्छे तरीके से नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है। इसके अलावा नियमित रूप से आंखों की जांच जरूर कराते रहें। ब्लड शुगर के अलावा ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल का बढ़े रहना भी आंखों के लिए हानिकारक है। 

डायबिटीज के शिकार लोगों को आहार को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। स्वस्थ और पौष्टिक आहार, विटामिन ए-सी, एंटीऑक्सीडेंट वाली चीजें आंखों की समस्याओं के कम करने और शुगर को कंट्रोल रखने में भी मददगार हो सकती है।


-------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें