दुनियाभर के लिए वायु प्रदूषण सबसे बड़े खतरों में से एक बना हुआ है। प्रदूषण जनित तमाम बीमारियों के कारण हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां भी कई शहरों में प्रदूषण का खतरा साल-दर साल बढ़ता ही जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ता जा रहा प्रदूषण का स्तर फेफड़ों और हृदय सहित शरीर के तमाम अन्य अंगों को भी गंभीर क्षति पहुंचा रहा है। इसे से संबंधित हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण लोगों को मानसिक रूप से कमजोर बना रहे हैं, सूक्ष्म कणों का बढ़ता हुआ स्तर डेमेंशिया जैसे मनोरोग का कारण बन रहा है।
वाशिंगटन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान वायु प्रदूषण और डेमेंशिया के बीच के संबंधों के बारे में पता लगाया है। डेमेंशिया, मानसिक रोगों की एक गंभीर समस्या है जिसमें लोगों में कमजोर याददाश्त, भाषा को समझने, समस्याओं का समाधान कर पाने और सोचने की क्षमता से संबंधित दिक्कतें हो सकती हैं। यह समस्या व्यक्ति के सामान्य जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर देती हैं। वैज्ञानिकों ने अध्ययन के आधार पर लोगों को डेमेंशिया से बचे रहने के लिए शुद्ध वातावरण में रहने की सलाह दी है। आइए आगे की स्लाइडों में अध्ययन की महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं।