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वायु प्रदूषण: सुबह उठते ही गले में होती है खराश? जानिए क्यों होती है ये समस्या और कैसे करें बचाव

Mon, 26 Oct 2026 05:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में प्रदूषण के कारण सुबह गले में खराश, जलन और सूखी खांसी हो सकती है। ठंडी हवा, एलर्जी और मुंह खोलकर सोना भी इसके कारण हैं। इस तरह की समस्याएं बार-बार होने पर हवा की गुणवत्ता चेक करें, धूल-धुएं से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और परेशानी लगातार बनी रहने पर डॉक्टर से सलाह लें।
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वायु प्रदूषण के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Amarujala.com/AI
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के जोखिमों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट कर हैं। वैसे तो हर साल राजधानी में नवंबर के आसपास वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है, लेकिन इस बार पहले से ही लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतते रहने को लेकर सावधान किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण कई तरह की बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इसे फेफड़ों के साथ हार्ट, हड्डियों पर भी असर हो सकता है। इतना ही नहीं कुछ अध्ययनों में प्रदूषण के संपर्क के कारण कैंसर का खतरा बढ़ने को लेकर भी अलर्ट किया जा रहा है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को इन दिनों में खास सावधानी बरतते रहने की सलाह दे रहे हैं।

दिल्ली में सर्दियां और प्रदूषण की शुरुआत होते ही कई लोगों को सुबह उठने पर गले में खराश, सूखापन, खांसी और नाक बंद होने जैसी परेशानियां होने लगती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, प्रदूषण इसका बड़ा कारण हो सकता है। क्या आप भी इस तरह की दिक्कतों से अक्सर परेशान रहते हैं?
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खांसी और सांस की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
प्रदूषण के कारण गले में खराश की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, प्रदूषण वाली हवा में मौजूद पीएम 2.5, पीएम 10 और दूसरे प्रदूषक सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर गले और श्वसन तंत्र में जलन पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा सर्दियों के दौरान ठंडी और शुष्क हवा, कमरे में धूल भी सुबह गले में खराश की वजह बन सकती है। अगर यह परेशानी लगातार बनी रहती है, तो कई बार इसके पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
 
सुबह गले में खराश महसूस होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। 
 
  • रातभर सोते समय शरीर में लार का प्रवाह और निगलने की प्रक्रिया कम हो जाती है, जिससे मुंह और गला सूख सकता है। 
  • अगर आप मुंह खोलकर सोते है या नाक बंद रहने की समस्या है, तो भी गले का सूखापन और बढ़ सकता है।
  • इसके अलावा, सर्दियों-प्रदूषण के दौरान ठंडी और शुष्क हवा के साथ घर के अंदर जमा धूल भी परेशानी बढ़ा सकती है। 
  • अगर कमरे में प्रदूषित हवा आ रही हो, तो रातभर उसके संपर्क में रहने से सुबह लक्षण ज्यादा महसूस हो सकते हैं।
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वायु प्रदूषण के खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
 प्रदूषण से बचने के लिए सुबह क्या करें?

अगर आपको लगातार गले में खराश-जलन की समस्या हो रही है तो सबसे पहले अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) चेक करें। भारत के राष्ट्रीय एयर क्वालिटी इंडेक्स मानकों के मुताबिक 201-300 का स्तर 'खराब', 301-400 'बहुत खराब' और 401–500 'गंभीर' श्रेणी में आता है।
 
  • प्रदूषण बढ़ने पर बाहर लंबे समय तक रहने और एक्सरसाइज करने से बचें। बाहर निकलना जरूरी हो, तो अच्छी फिटिंग वाला मास्क पहनें।
  • घर की खिड़कियां और दरवाजे प्रदूषण के ज्यादा स्तर के दौरान बंद रखें, लेकिन सुरक्षित वेंटिलेशन का भी ध्यान रखें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और गले को नम रखें।
  • गले में आराम के लिए गुनगुने नमक-पानी से गरारे कर सकते हैं।
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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com
कब हो जाएं सावधान?

अगर सुबह गले में हल्की खराश होती है और कुछ समय बाद ठीक हो जाती है, तो ये समस्या आमतौर पर खूब पानी पीने, धूल-धुएं से बचने और हवा की गुणवत्ता पर ध्यान देने से आमतौर पर ठीक हो जाती है। लेकिन अगर ये समस्या बार-बार हो रही है या लगातार बढ़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
 
  • सांस लेने में परेशानी या सीने में जकड़न, तेज बुखार या गले में बहुत ज्यादा दर्द के साथ  निगलने में कठिनाई  हो तो इसे अनदेखा बिल्कुल न करें।
  • अस्थमा या फेफड़ों की क्रॉनिक बीमारी वाले लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह लेते रहना चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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