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सावधान: कोविशील्ड वैक्सीन के कारण हो सकता है रक्त संबंधी यह विकार, अध्ययन में दावा

Thu, 10 Jun 2021 06:42 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैकसीन पर अध्ययन - फोटो : Social media
कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं। हाल ही में देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैक्सीनेशन अभियान को और तेज करने पर जोर दिया है। भारत में कोरोना की फिलहाल तीन वैक्सीन- कोविशील्ड, कोवैक्सीन और रूस द्वारा निर्मित स्पूतनिक उपलब्ध है। देश में 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। इस बीच वैक्सीनेशन को लेकर प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इसके कुछ गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को सचेत किया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन (जिसे भारत में कोविशील्ड के नाम से जाना जाता है) रक्त संबंधी एक विकार का कारण बन सकती है।
इस अध्ययन ने लोगों के मन में तमाम तरह से डर का माहौल बना दिया है। गौरतलब है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में कोविशील्ड वैक्सीन की ही उपलब्धता है। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिकों ने कोविशील्ड वैक्सीन के कारण सामने आई किस समस्या के बारे में लोगों को सचेत किया है?
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कोविशील्ड वैक्सीन के कारण रक्त में प्लेटलेट की कमी के मामले - फोटो : Pixabay
रक्त में हो सकती है प्लेटलेट्स की कमी
ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के अनुसंधानकर्ताओं के नेतृत्व में हुए अध्ययन में पाया गया कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के कारण रक्त में प्लेटलेट्स की कमी हो सकती है। इस समस्या को इडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक प्यूरपरा (आईटीपी) के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा कुछ लोगों में रक्त का थक्का बनने के मामले भी देखने को मिले हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक कोविशील्ड वैक्सीन के कारण आईटीपी की समस्या हो सकती है, हालांकि इसके मामले बहुत ही कम देखने को मिले हैं। यह अध्ययन जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है।
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बुजुर्गों में देखी गईं ज्यादा दिक्कतें - फोटो : पीटीआई
उम्रदराज लोगों में ज्यादा खतरा
वैज्ञानिकों के मुताबिक यह स्थिति प्रति 10 लाख खुराक में करीब 11 मामलों में हो सकती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि लोगों में प्लेटलेट्स की संख्या कम होने के सामान्य तौर पर कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं जबकि कुछ मामलों में रक्तस्राव या फिर खून का थक्का जमने की समस्या हो सकती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि 65 से 70 साल की आयु वाले लोगों (जिन्हें पहले से ही दिल की बीमारी, मधुमेह या किडनी की बीमारी हो) में इसका खतरा अधिक देखने को मिला है। जबकि कम उम्र के लोगों में ऐसे मामले बहुत ही कम देखे गए हैं।

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कोरोना वैक्सीन के कारण आईटीपी के मामले - फोटो : iStock
वैज्ञानिकों ने बताया कि चूंकि टीकाकरण कराने वाले बहुत कम लोगों में आईटीपी के मामले देखने को मिले हैं, इस वजह से खून के थक्के जमने के अन्य प्रकारों के लिए भी क्या वैक्सीनेशन जिम्मेदार हो सकता है, इस बारे में पता नहीं लगाया जा सका है। खून के थक्के जमने के अन्य प्रकारों में अति दुर्लभ सेरेब्रेल वेनोस साइनस थ्रोम्बोसिस या सीवीएसटी (दिमाग में खून का थक्का जमने की घटना) शामिल है।
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वैज्ञानिकों ने कहा वैक्सीनेशन अभियान को रोकें नहीं - फोटो : iStock
फाइजर वैक्सीन में ऐसा खतरा नहीं
वैज्ञानिकों ने स्कॉटलैंड में टीका लगवा चुके 54 लाख लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया। अनुसंधानकर्ताओं ने राष्ट्रव्यापी टीकाकरण के बाद इन लोगों में आईटीपी, खून के थक्के जमने और रक्त स्राव की घटनाओं का विश्लेषण किया। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के डर को देखते हुए भी वैक्सीनेशन अभियान प्रभावित नहीं होना चाहिए। कोविशील्ड के अलावा वैज्ञानिकों ने फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन पर भी इस तरह का अध्ययन किया, हालांकि उसमें आईटीपी के जोखिम नहीं पाए गए हैं। अन्य टीकों को अध्ययन में शामिल नहीं किया गया था।

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स्रोत और संदर्भ: 
COVID-19 vaccination and immune thrombocytopenia

अस्वीकरण नोट: यह लेख जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। बताए गए समस्याओं के बारे में विस्तार से जानने के लिए किसी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। इस शोध के डर से वैक्सीन लेने बंद न करें, भारतीयों पर इस तरह का अब तक कोई भी अध्ययन नहीं किया गया है।
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