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कोरोना प्रतिरूपण रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने विकसित की नई पद्धति, कोविड के इलाज में मिलेगी मदद

Sat, 17 Oct 2020 03:29 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस के संक्रमण से दुनिया के 210 से ज्यादा देश जूझ रहे हैं। भारत, ब्रिटेन, अमेरिका समेत कई देशों में इसकी वैक्सीन और उपचार के अन्य तरीकों के लिए शोध हो रहे हैं। वैक्सीन को लेकर कई देशों को कामयाबी मिल रही है। कोरोना से जारी जंग में भारत, अमेरिका जैसे देशों में आने वाले कुछ महीने बहुत ही निर्णायक साबित होने वाले हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोरोना की एक कारगर और सुरक्षित वैक्सीन उपलब्ध होगी। वैक्सीन से अलग, कोरोना के उपचार के अन्य तरीकों पर भी शोध हो रहे हैं। इसी क्रम में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रोटीन को रोकने की पद्धति विकसित की है, जिसका इस्तेमाल कोरोना वायरस, प्रतिरक्षा तंत्र के महत्वपूर्ण घटकों को निष्क्रिय करने के लिए करता है। इस खोज से कोविड-19 के इलाज के लिए नई दवा बनाने में मदद मिल सकती है। 
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Coronavirus - फोटो : iStock
  • अमेरिका के सैन एंटोनियो में टेक्सास स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों सहित अन्य शोधकर्ताओं ने ऐसे दो अणुओं का पता लगाया है, जो सार्स कोव-2 पीएलप्रो नामक कोरोना वायरस द्वारा उपयोग किए जाने वाले अणु संबंधी 'सीजर' एंजाइम (किण्वक) को रोकते हैं।
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
  • 'साइंस' पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि सार्स-कोव-2-पीएलप्रो वायरल और मानव प्रोटीन दोनों को संवेदित और संसाधित करके संक्रमण को बढ़ावा देता है। यूटी हेल्थ सैन एंटोनियो में जैव रसायन और संरचनात्मक जीव विज्ञान के सहायक प्रोफेसर तथा वरिष्ठ शोध लेखक शॉन के ऑल्सन ने कहा, 'यह इंजाइम दोहरा रूप धारण कर लेता है।'

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Coronavirus - फोटो : Pexels
  • ओल्सन ने कहा, 'यह प्रोटीन को निकलने के लिए प्रोत्साहित करता है जो वायरस के दोहरा रूप धारण करने लिए आवश्यक है, और यह साइटोकिन्स और केमोकिंस नामक अणुओं को भी रोकता है जो संक्रमण पर हमला करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को संकेत देते हैं।'
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
  • इस शोध के जरिए वैज्ञानिकों ने ऐसे अवरोधकों का पता लगाया है जो सार्स-कोव-2-पीएलप्रो की गतिविधि को अवरुद्ध करने में बहुत कुशल हैं। यह शोध कोरोना से जंग में एक नई उम्मीद जगाता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सबकुछ ठीक रहा तो कोरोना के इलाज के लिए नई दवा बनाने में यह शोध काफी मददगार हो सकता है। 
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