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WHO ने कहा- रेमडेसिविर समेत ये चार दवाएं कोरोना के इलाज में कारगर नहीं, गिलिएड ने जताई आपत्ति

Sat, 17 Oct 2020 03:17 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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Coronavirus Drug Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रेमडेसिविर और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) समेत चार दवाओं को कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के इलाज में बहुत कम प्रभावी बताया है। डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 के इलाज में ये चार खास दवाएं कितनी कारगर हैं इसे लेकर विस्तृत परीक्षण किया था। रेमडेसिविर वो पहली दवा थी जिसे कोरोना वायरस के इलाज के लिए सबसे पहले इस्तेमाल किया गया था। ये दवा हाल में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इलाज में भी इस्तेमाल हुई थी। हालांकि रेमडेसिविर की निर्माता कंपनी गिलिएड ने डब्ल्यूएचओ के अध्ययन में आए परिणामों को खारिज किया है। गिलिएड ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि अध्ययन के निष्कर्ष दूसरे अध्ययनों से मेल नहीं खाते और इन परिणामों की समीक्षा किया जाना बाकी है।
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रेमडेसिविर दवा(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Hetero website
क्या कहता है डब्ल्यूएचओ का अध्ययन
डब्ल्यूएचओ ने सॉलिडैरिटी ट्रॉयल के दौरान कुल चार दवाओं का परीक्षण किया, जिनमें रेमडेसिविर, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, ऑटो-इम्यून ड्रग इंटरफेरॉन और एचआईवी की दवाओं का संयोजन लोपिनाविर और रिटोनाविर शामिल हैं। ब्रिटेन में कोविड-19 के गंभीर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो रहे कम कीमत वाले स्टेरॉइड डेक्सामेथासोन को इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया है। 30 अलग-अलग देशों के 500 अस्पतालों में 11,266 व्यस्क मरीजों पर इन चार दवाओं का परीक्षण किया गया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डब्ल्यूएचओ के नतीजों में पाया गया है कि ये दवाएं मरीजों की जान बचाने और संक्रमण के दिनों को कम करने में भी कारगर साबित नहीं हुई हैं। हालांकि, इन नतीजों की अभी समीक्षा की जानी बाकी है। डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने बुधवार को कहा कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और लोपिनाविर और रिटोनाविर दवाओं का परीक्षण जून में ही रोक दिया गया था क्योंकि वो पहले ही अप्रभावी साबित हो गई थीं। हालांकि, अन्य दवाओं पर परीक्षण जारी रखे गए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नतीजे पिछले महीने गिलिएड के अध्ययन में आए नतीजों से बिल्कुल अलग हैं। गिलिएड ने कहा था कि प्लेसेबो दिए जाने वाले मरीज़ों की तुलना में रेमडेसिवीर से कोरोना वायरस से ठीक होने का समय पांच दिन कम हो जाता है. गिलिएड के परीक्षण में 1000 मरीज शामिल थे।

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रेमडेसिविर दवा(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : social media
गिलिएड की प्रतिक्रिया
गिलिएड सांइसेज ने डब्ल्यूएचओ के नतीजों को खारिज करते हुए कहा है, ''ये डाटा असंगत लग रहा है। रेमडेसिविर के फायदे कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके आक्समिक और नियंत्रित अध्ययनों से मिले ज़्यादा ठोस प्रमाणों से प्रमाणित होते हैं। हमें चिंता है कि ये ओपन (खुले) लेबल वाला वैश्विक परीक्षण प्राप्त डेटा कठोर समीक्षा से नहीं गुजरा है जो कि इस तरह की उपयोगी वैज्ञानिक चर्चा के लिए जरूरी है।''
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रेमडेसिविर दवा(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
अमेरिका में एक मई से आपातकालीन स्थिति में रेमडेसिविर के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। इसके बाद कई और देशों में भी इसके इस्तेमाल को मंजूरी दे दी गई थी। वहीं हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टर के निर्देश पर इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, ये कितनी कारगर है इसका भी अब तक कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। इन नतीजों को देखते हुए डॉक्टर स्वामीनाथन कहती हैं, ''हम मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज और कुछ नई एंटी-वायरल दवाओं पर विचार कर रहे हैं जो पिछले कुछ महीनों में विकसित की गई हैं।''
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