प्रतीकात्मक तस्वीर
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वैक्सीन के साइड इफेक्ट से कैसे निबटेगी सरकार?
मौजूदा 29 हजार कोल्ड-स्टोरेज को वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, क्योंकि ये वैक्सीन दो डिग्री सेल्सियस से लेकर आठ डिग्री सेल्सियस तापमान में ही रखी और वितरित की जा सकती हैं। ऐसे में वैक्सीन के लिए एक कोल्ड-चेन बनानी होगा। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि भारत में -80 डिग्री तक के बेहद ठंडे कोल्ड-स्टोरेज भी उपलब्ध हैं, जो हरियाणा के पशु चिकित्सा और कृषि से जुड़े रिसर्च सेंटर में बनाए गए हैं। एक बड़ा सवाल यह भी है कि जिन लोगों को वैक्सीन दी जाएगी उसके बाद उन पर पड़ने वाले असर को कैसे सरकार मॉनिटर करेगी?
ये सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन का इस्तेमाल करने के बाद एक वॉलंटियर ने यह दावा करते हुए कंपनी पर मुकदमा दायर किया कि वैक्सीन लेने के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई। इसके जवाब में अधिकारी ने कहा, 'हमें पारदर्शी होना होगा और ऐसे साइड इफेक्ट्स जैसे मामलों से सही तरीके से निपटना होगा। इसके लिए एक योजना तैयार भी की गई है।'