प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रमुख शोधकर्ता फेरगस ग्लीसन ने कहा कि कोरोना के कई मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी कई महीनों तक सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है, जबकि सीटी स्कैन से पता चलता है कि उनके फेफड़े सामान्य रूप से ही काम कर रहे हैं, लेकिन जब हाइपरपोलराइज्ड जीनन एमआरआई (XeMRI) स्कैन किया गया, तो पाया गया कि सीटी स्कैन में न दिखने वाली असामान्यता फेफड़ों के सभी हिस्सों में सामान्य रूप से ऑक्सीजन पहुंचने से रोकती है।