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बड़ी खबर: गंभीर कोविड संक्रमितों की भी बचाई जा सकेगी जान, वैज्ञानिकों ने इस खास दवा को बताया कारगर

Tue, 16 Nov 2021 05:42 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना मरीजों की बच सकेगी जान - फोटो : iStock
दुनिया के कई देशों में कोरोना का संकट एक बार फिर से लौट रहा है। भारत में भी पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मामलों में उतार-चढ़ाव की स्थिति देखने को मिल रही है, इसमें संक्रमितों के मृत्यु की बढ़ती संख्या डॉक्टरों के लिए अब भी बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड वैक्सीन लेने वाले लोगों को कोविड के गंभीर संक्रमण और इससे होने वाली मौत का खतरा कम हो सकता है। इस बीच अध्ययनकर्ताओं ने हालिया शोध में कोरोना रोगियों में मौत के खतरे को कम करने वाले एक और उपाय के बारे में लोगों को सूचित किया है।

जामा नेटवर्क में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड के जिन मरीजों को इलाज के दौरान सेलेक्टिव सेरोटोनिन रूप्टेक इनहिबिटर (एसएसआरआई) एंटीडिप्रेसेंट दवाएं दी गईं, उनमें अन्य लोगों की तुलना मे मौत का खतरा काफी कम पाया गया। इस अध्ययन के आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ खास एंटीडिप्रेसेंट दवाएं कोविड रोगियों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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एसएसआरआई एंटीडिप्रेसेंट दवा पाई गई असरदार - फोटो : PTI
कोविड रोगियों में एसएसआरआई दवाओं के दिखे अच्छे प्रभाव
अमेरिका में  87 स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि एसएसआरआई दवाएं कोविड के गंभीर मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि इसे विस्तृत स्तर पर साबित करने के लिए नैदानिक परीक्षणों की आवश्यकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (यूसी) में एसोसिएट प्रोफेसर मरीना सिरोटा कहते हैं, कोरोना संक्रमितो में कुछ एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के असर देखने को मिले हैं, हालांकि अलग-अलग रोगियों पर इसके परिणाम को जानने के लिए विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है।
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एंटीडिप्रेसेंट दवा का दिखा लाभ - फोटो : Pixabay
पाच लाख से अधिक लोगों पर किया गया अध्ययन
अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने कोविड-19 डी-आइडेंटिफाइड डेटाबेस से इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इसमें अमेरिका के लगभग 5 लाख कोविड रोगियों की जानकारी थी। इसमें जनवरी-सितंबर 2020 के बीच कोविड-19 के निदान वाले 83,584 वयस्क रोगी भी शामिल थे। इनमें से 3,401 रोगियों को इलाज के दौरान एसएसआरआई दवाएं दी गईं। उम्र, लिंग और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर वैज्ञानिकों ने पाया कि एसएसआरआई एंटीडिप्रेसेंट दवा फ्लुओक्सेटीन दवाओं के इस्तेमाल से कोविड रोगियों के मरने की संभावना को 28 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

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कोविड का इलाज - फोटो : Pixabay
इन बातों पर भी करें गौर
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि किसी भी प्रकार के एसएसआरआई दवा लेने वाले रोगियों कोविड से मरने का खतरा आठ फीसदी तक कम हो सकता है। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हाल ही में फाइजर और मर्क द्वारा विकसित नए एंटीवायरल के हाल के नैदानिक परीक्षणों में पाए गए लोगों की तुलना में कम हैं। वहीं शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया से इस महामारी को खत्म करने के लिए और अधिक विकल्पों की आवश्यता होगी। 
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कोविड की इलाज होगा आसान - फोटो : getty images
क्या कहते है शोधकर्ता
यूसी सैन फ्रांसिस्को में बकर कम्प्यूटेशनल हेल्थ साइंसेज इंस्टीट्यूट (बीसीएचएसआई) में वैज्ञानिक टोमिको ओस्कोत्स्की ने कहते हैं, फिलहाल हमें अध्ययन में  उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।  इस अध्ययन से प्राप्त डेटा के आधार पर हम आगे के विकल्पों के बारे में सोच सकते हैं। कोविड-19 के इलाज के लिए हमें इस दवा के और अधिक परीक्षण से मदद मिल सकती है।


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स्रोत और संदर्भ
Mortality Risk Among Patients With COVID-19 Prescribed Selective Serotonin Reuptake Inhibitor Antidepressants

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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