कोरोना संक्रमण पिछले चार साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए जोखिम बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनियाभर में फिलहाल संक्रमण की रफ्तार काफी नियंत्रित है। पिछले महीनों में ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट JN.1 के कारण कई देशों में संक्रमण का जोखिम बढ़ा था, हालांकि समय रहते इसपर काबू पा लिया गया।
2023 के आखिरी महीनों में भारत में भी कई राज्यों में कोरोना के मामलों में उछाल दर्ज की गई थी, पर यहां भी अब संक्रमण की स्थिति काफी कंट्रोल में है। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर में ज्यादातर लोगों का टीकाकरण हो चुका है, साथ ही कई देशों में हर्ड इम्युनिटी बन चुकी है इसके कारण अब कोरोना के गंभीर रोग के मामले कम देखे जा रहे हैं।
इस बीच विशेषज्ञों की एक टीम ने 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को कोविड वैक्सीन की एक और डोज लेने की सलाह दी है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने सलाह दी है कि 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग, जिनके आखिरी टीकाकरण को चार माह से अधिक का समय बीत गया है उन्हें एक और बूस्टर डोज लगवा लेना चाहिए।
इस रिपोर्ट के बाद से सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या कोरोना का कोई और नया वैरिएंट आ गया है, जिसके खतरे को देखते हुए इस तरह की सलाह दी जा रही है?