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Ultra Processed Food: हृदय रोग-डायबिटीज के साथ समय से पहले मौत का जोखिम बढ़ा सकते हैं ऐसे आहार, हो जाएं सावधान

Fri, 01 Mar 2024 09:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स के नुकसान - फोटो : iStock
शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखने के लिए आहार का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, आप जिस प्रकार की चीजों का सेवन करते हैं शरीर पर उसका सीधा असर होता है। कुछ चीजें आपको कई रोगों से बचा सकती हैं, जबकि कुछ के कारण आप गंभीर बीमारियों के शिकार भी हो सकते हैं। जिन खाद्य पदार्थों को सेहत के लिए सबसे नुकसानदायक पाया गया है, उनमें प्रोसेस्ड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड चीजें प्रमुख हैं।

द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में हाल ही में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि जो लोग अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करते हैं उनमें मानसिक स्वास्थ्य विकार, हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा सहित करीब 32 कई प्रकार गंभीर बीमारियों जोखिम अधिक हो सकता है।

इसे समय से पहले मृत्यु के खतरों को भी बढ़ाने वाला पाया गया है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में अधिक कैलोरी होती है जिससे वजन बढ़ने और स्वास्थ्य जटिलताएं बढ़ने का भी खतरा होता है।
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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्यों के नुकसान - फोटो : iStock
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ और इसके नुकसान

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर ये खाद्य पदार्थ होते क्या हैं?

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में चीनी, वसा और नमक की मात्रा अधिक होती है। ये खाद्य पदार्थ मुख्यरूप से 'रेडी टू यूज' स्टाइल के होते हैं। आइसक्रीम, सॉस, क्रिस्प्स, बिस्कुट, कार्बोनेटेड पेय, इंस्टैंट सूप आदि इसी श्रेणी में आते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि इन चीजों के अधिक सेवन से शरीर में कैलोरी और फैट की मात्रा बढ़ने का खतरा रहता है। इनके अधिक सेवन से शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर का स्तर भी अधिक हो सकता है, यही कारण है कि ऐसे खाद्य पदार्थों से सेहत को कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं।
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स्वस्थ खाद्य पदार्थों का करें सेवन - फोटो : iStock
हृदय रोगों का बढ़ जाता है खतरा

अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया, जिन लोगों ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड चीजों को सेवन अधिक किया था उनमें कार्डियोवैस्कुलर डिजीज और इसके कारण मौत का खतरा 50 फीसदी अधिक पाया गया। इस तरह के खाद्य पदार्थों को एंग्जाइटी जैसी मानसिक बीमारियों का जोखिम 48-53 फीसदी और टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को 12 प्रतिशत तक बढ़ाते हुए देखा गया है।

ऑस्ट्रेलिया में डीकिन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और जॉन्स हॉपकिन्स के शोधकर्ताओं ने करीब 10 मिलियन (एक करोड़) लोगों पर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का विश्लेषण किया। इन खाद्य पदार्थों को नींद संबंधी विकारों, मानसिक स्वास्थ्य विकारों और क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारक पाया गया है।

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गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों का खतरा - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

शोधकर्ताओं ने कहा, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड चीजों के कारण अस्थमा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों और कैंसर के खतरे को लेकर साक्ष्य सीमित हैं, पर इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने कहा अगर इसका अक्सर सेवन करते हैं तो समय से पहले मौत का खतरा भी हो सकता है। चूंकि इन चीजों में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स की मात्रा कम होती है इसलिए इनका सेवन शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
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स्वस्थ आहार का करें सेवन - फोटो : istock
स्वस्थ और पौष्टिक चीजों की बढ़ाएं मात्रा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को रोग मुक्त रखने के लिए जरूरी है कि आप स्वस्थ और पौष्टिक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करें। अध्ययनों में पाया गया है कि बीमारियों से बचाव के लिए भोजन की थाली में एक तिहाई मात्रा फलों और सब्जियों की होनी चाहिए। आहार में रंग बिरंगी सब्जियों-फलों की मात्रा बढ़ाकर एंटीऑक्सीडेंट्स, प्रोटीन और विटामिन्स प्राप्त किए जा सकते हैं जिससे आप बीमारियों से बचाव कर सकते हैं।


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स्रोत और संदर्भ
Ultra-processed food exposure and adverse health outcomes: umbrella review of epidemiological meta-analyses

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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