फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Childhood Cancer: क्या 10 साल से कम आयु के बच्चे भी हो सकते हैं कैंसर के शिकार, क्या है इसकी वजह?

Sat, 17 Feb 2024 11:55 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
बच्चों में कैंसर के जोखिम कारक - फोटो : iStock
कैंसर हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनने वाली बीमारी है, समय के साथ इस रोग का खतरा और भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आनुवांशिकता के साथ लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण आप कैंसर के शिकार हो सकते हैं। लगभग सभी उम्र के लोगों में समय के साथ-साथ कैंसर का जोखिम बढ़ता हुआ देखा गया है।

पुरुषों में प्रोस्टेट-लंग्स और महिलाओं में ब्रेस्ट-सर्वाइकल कैंसर का जोखिम सबसे अधिक रिपोर्ट किया जाता रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बच्चे भी कैंसर के शिकार हो सकते हैं?

इस बारे में किए गए अध्ययनों में बताया गया है कि कैंसर किसी भी उम्र और लिंग के व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है। बच्चे भी इसमें शामिल हैं। कुछ प्रकार के जोखिम कारक बच्चों को भी कैंसर का शिकार बना रहे हैं, इसके लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी हो जाता है।
विज्ञापन

2 of 5
बच्चे हो सकते हैं कैंसर के शिकार - फोटो : Pixabay
बच्चों में क्या हैं कैंसर के कारण?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बच्चों में होने वाले अधिकांश कैंसर जीन में परिवर्तन के कारण होते हैं जो अनियंत्रित कोशिका वृद्धि के कारण ट्यूमर और कैंसर का खतरा बढ़ा देते हैं। कुछ बच्चों में कैंसर के लिए रेडिएशन के अत्यधिक संपर्क को प्रमुख कारण माना गया है। शोधकर्ता बताते हैं, सेकेंडहैंड स्मोकिंग यानी अगर परिवार में कोई धूम्रपान करता है और बच्चा उसके धुएं के संपर्क में रहता है तो इसके कारण भी कैंसर  विकसित होने का खतरा हो सकता है।

हालांकि वयस्कों के विपरीत बच्चों में कुछ विशेष प्रकार के कैंसर का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। 
विज्ञापन

3 of 5
ल्यूकेमिया हो सकती है समस्याकारक - फोटो : iStock
ल्यूकेमिया का बच्चों में बढ़ रहा है जोखिम

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की रिपोर्ट से पता चलता है कि ल्यूकेमिया का खतरा बच्चों में सबसे अधिक हो सकता है। ल्यूकेमिया, रक्त कोशिकाओं में होने वाला आम प्रकार का कैंसर है। ये बच्चों में होने वाले सभी प्रकार के कैंसर का लगभग 28% है। ल्यूकेमिया, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, थकान, कमजोरी, त्वचा में पीलापन, रक्तस्राव या चोट की समस्या, अक्सर बुखार बने रहने, वजन घटने जैसे लक्षण पैदा कर सकता है।

ल्यूकेमिया शरीर में तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए अक्यूट ल्यूकेमिया की स्थिति में तुरंत कीमोथेरेपी जैसे उपचार को प्रयोग में लाया जाता है। 

4 of 5
मस्तिष्क के कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर

ल्यूकेमिया के साथ बच्चों में जिस कैंसर का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर होना उसमें आम है। ये बचपन में होने वाले कैंसर का लगभग 26% है। मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर कई प्रकार के होते हैं, इसकी गंभीर स्थिति जानलेवा दुष्प्रभावों वाली भी हो सकती है। बच्चों और वयस्कों दोनों में मस्तिष्क ट्यूमर की समस्या होना अधिक आम है।

ब्रेन ट्यूमर, मस्तिष्क के निचले हिस्से जैसे सेरिबैलम या ब्रेन स्टेम में शुरू होते हैं। इसके कारण सिरदर्द, मतली, उल्टी, धुंधली या दोहरी दृष्टि, चक्कर-दौरे पड़ने की समस्या अधिक देखी जाती रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
हड्डियों में भी विकसित हो सकता है कैंसर - फोटो : iStock
हड्डियों में भी हो सकता है कैंसर

हड्डियों में शुरू होने वाला कैंसर अधिकतर बच्चों और किशोरों में होता है। बचपन में होने वाले कैंसर के लगभग 3% मामले हड्डियों में होने वाले कैंसर के होते हैं।

ओस्टियोसारकोमा सबसे आम प्रकार का कैंसर है जो आमतौर पर उन क्षेत्रों में विकसित होता है जहां हड्डियां तेजी से बढ़ रही होती हैं जैसे पैर या बांह की हड्डियों का छोर। यह अक्सर हड्डियों में दर्द का कारण बनता है जो रात में अधिक हो सकती है। हड्डियों में कैंसर की समस्या होने के लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी है।



--------------
स्रोत और संदर्भ
Types of Cancer that Develop in Children


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें