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Cataracts: उम्र बढ़ने पर बहुत कॉमन है आंखों की ये बीमारी, ध्यान न देने पर हो सकते हैं अंधेपन के शिकार

Mon, 11 Sep 2023 06:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आंखों की समस्या - फोटो : istock
क्या आपके भी माता-पिता को समय के साथ कम दिखना शुरू हो गया है? अगर हां तो इसे सिर्फ उम्र से संबंधित समस्या मानकर न चलें, कुछ मामलों में ये आंखों की गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 50 की आयु के बाद मोतियाबिंद की समस्या होना काफी सामान्य माना जाता है। मोतियाबिंद आंखों में होने वाली बीमारी है जिसमें लेंस वाले हिस्से में धुंधलापन होने की दिक्कत बढ़ जाती है। इस स्थिति में आपको धुंधला दिखाई देने या रोशनी के चारों ओर चकाचौंध की दिक्कत होती रह सकती है। समय पर इसका इलाज किया जाना आवश्यक माना जाता है।

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि मोतियाबिंद की समस्या का अगर समय रहते इलाज न हो पाए तो इससे आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा रहता है। मोतियाबिंद के निदान के बाद सर्जरी की आवश्यकता होती है जिसमें कृत्रिम लेंस लगाई जाती है।

आइए जानते हैं कि इस रोग का खतरा किन लोगों में अधिक होता है और इससे बचाव के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं?
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आंखों में होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
क्यों होती है मोतियाबिंद की समस्या?

अधिकांश मामलों में मोतियाबिंद विकसित होने का कारण उम्र बढ़ना, आंखों में चोट लगना या फिर आंख के लेंस को बनाने वाले ऊतकों में परिवर्तन हो सकता है। लेंस में मौजूद प्रोटीन और फाइबर का ब्रेक डाउन होने लगता है जिससे आपको दृष्टि में धुंधलापन होने का जोखिम बढ़ जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ आनुवांशिक विकार भी मोतियाबिंद के खतरे को बढ़ा सकते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि स्टेरॉयड दवाओं के लंबे समय तक उपयोग से भी मोतियाबिंद विकसित हो सकता है।
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आंखों में होने वाली दिक्कतें - फोटो : iStock
कैसे पहचानें कहीं आपको मोतियाबिंद तो नहीं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोतियाबिंद के लक्षणों का समय रहते पता चलना और इसका इलाज बहुत आवश्यक माना जाता है। इसमें आपको धुंधला दिखाई देने या आंखों के सामने फिल्म बनी रहने जैसी समस्या हो सकती है। इसके अलावा आंखों में होने वाले अन्य कुछ प्रकार के बदलावों के प्रति भी सावधानी बरतते रहनी सलाह दी जाती है। 
  • तेज धूप, हेडलाइट्स या लैंप के प्रति संवेदनशीलता।
  • चकाचौंध, रोशनी के चारों ओर धारियां दिखना।
  • रात में देखने में कठिनाई होना।
  • पढ़ने के लिए तेज रोशनी की आवश्यकता है।
  • दोहरी दृष्टि की समस्या। 
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मोतियाबिंद में होती है सर्जरी की जरूरत - फोटो : iStock
मोतियाबिंद से बचाव के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोतियाबिंद से बचाव के लिए कोई खास तरीका नहीं है, हालांकि कुछ सामान्य से उपायों का पालन करके आंखों की बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि नियमित रूप से आंखों की जांच कराते रहें। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान भी आपके जोखिमों को बढ़ा सकती है, आंखों को स्वस्थ रखने और मोतियाबिंद से बचाव के लिए धूम्रपान न करने की सलाह दी जाती है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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