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ऑस्टियोपोरोसिस: बुजुर्गों में आम होती है यह बीमारी, हड्डी टूटने का बना रहता है डर, जानिए लक्षण

Thu, 02 Sep 2021 08:18 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. I.N. Vajpai

डॉ. आईएन वाजपई 

न्यूरो सर्जन
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (न्यूरो सर्जरी), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल

अनुभव- 45 वर्ष

शरीर के स्वस्थ रहने के लिए हड्डियों का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी होता है। हालांकि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग खुद के ऊपर ध्यान नहीं दे पाते और ऐसे में शरीर को कई तरह की बीमारियां जकड़ लेती हैं। इनमें हड्डियों से जुड़ी बीमारियां भी शामिल हैं, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस। वैसे तो यह बीमारी बुजुर्गों में आम होती है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का विकास भी धीमा हो जाता है, हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, लेकिन यह बीमारी व्यस्कों में भी हो सकती है। दरअसल, इस बीमारी में हड्डियों का घनत्व घटने लगता है, जिससे उनके टूटने का डर बना रहता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित मरीज की हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि हल्की सी भी चोट लगने पर या मरीज के गिरने पर वो टूट जाती हैं। इसलिए समय रहते इसपर ध्यान देना जरूरी होता है, नहीं तो यह बीमारी खामोशी से आपको जकड़ती जाती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
महिलाओं को भी होता है अधिक खतरा 
  • उम्रदराज महिलाओं में भी ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक पाया जाता है। दरअसल, मासिक धर्म बंद हो जाने यानी मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घट जाता है, जिससे हड्डियों के क्षरण बढ़ता है और साथ ही इस बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण क्या हैं? 
  • अगर सही समय पर इस बीमारी के लक्षण जान गए तो इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। कमर, हाथ और गर्दन की हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द, पीठ दर्द, शरीर का झुका हुआ लगना, कमजोरी महसूस होना, आसानी से थक जाना, हड्डियों में लगातार फ्रैक्चर आना ऑस्टियोपोरोसिस के प्रमुख लक्षण हैं, जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण क्या हैं? 
  • शरीर में विटामिन डी की कमी 
  • कैल्शियम की कमी  
  • हाइपोथॉयराडिज्म यानी शरीर का पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं करना 
  • शराब और धूम्रपान, तंबाकू का अधिक सेवन 
  • बिना मूवमेंट की लाइफस्टाइल यानी योग-व्यायाम नहीं करना 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के लिए डाइट में इन चीजों को करें शामिल 
  • डेयरी उत्पाद (पनीर, दही, कम वसा, और नॉनफैट दूध) 
  • प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ (मीट, मछली, ओट्स, राजमा, दाल, ग्रीक योगर्ट) 
  • ताजे फल और सब्ज़ियां (संतरा, स्ट्रॉबेरी, पपीता, अनानास, केला, सरसों का साग, ब्रोकली, पालक, आलू, शकरकंद) 
नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन हैं। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरो सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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