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प्रतिदिन अंडे का सेवन दे सकता है डायबिटीज को न्योता, ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं की रिसर्च में हुआ है खुलासा

Tue, 17 Nov 2020 05:14 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixa

जहां अब तक डायबिटीज और खान-पान से जुड़े शोधों का दावा था कि अंडे के सेवन से मधुमेह नियंत्रण में रहता है वहीं ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं द्वारा चीन के 8,545 व्यस्कों पर की गई एक रिसर्च में यह निष्कर्ष निकला है कि प्रतिदिन 1 अंडे के सेवन से डायबिटीज टाइप-2 होने की 60 प्रतिशत संभावनाएं बढ़ जाती हैं। हालांकि ’अंडे का सेवन और डायबिटीज’ यह विषय हमेशा से ही विवादास्पद रहा है। शोध के स्टडी ऑथर डॉ मींग ली के अनुसार चीन के व्यस्कों पर हुई इस रिसर्च का आधार ’लंबे समय तक अंडे का सेवन और डायबिटीज के विकसित होने की संभावना’ रहा है। अगली स्लाइड्स के माध्यम से जानते हैं कि किस तरह से हुई है यह रिसर्च और क्या है इसका निष्कर्ष? 


 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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- फोटो : Social media
क्या है यह रिसर्च?
डॉ मींग ली की इस रिसर्च के मुताबिक, 1991 से 2009 तक चाइना हेल्थ एंड न्यूट्रीशियन सर्वे में शामिल हुए 8,545 व्यस्कों का डॉ ली और उनकी टीम ने पर्यवेक्षण किया। उनकी अंडा खाने की आदतों पर विशेषकर निगरानी रखी, साथ ही उनका फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट भी किया गया। निष्कर्ष में यह पाया गया कि-
- जो लोग प्रतिदिन 38 ग्राम से अधिक अंडे का सेवन करते हैं, उनमें 25 प्रतिशत तक मधुमेह के होने की संभावना है।
- जो लोग प्रतिदिन 50 ग्राम से अधिक अंडे का सेवन करते हैं, उनमें तो मधुमेह के होने की संभावना लगभग 60 प्रतिशत तक पाई गई।
- पुरुषों की तुलना में प्रतिदिन अंडे का सेवन महिलाओं के लिए ज्यादा हानिकारक है, उनमें टाइप- बी डायबिटीज की संभावना अधिक दिखाई पड़ी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
इस प्रकार थी पुरानी रिसर्च-
2015 में फीनलैंड के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में इसका विपरीत पहलू दर्ज किया था। उनकी रिसर्च के परिणाम के मुताबिक, प्रतिदिन एक अंडे के सेवन से टाइप-2 डायबिटिज के होने की संभावना कम हो जाती है। जो पुरुष प्रतिदिन अंडे का सेवन कर रहे थे, उनके रक्त में लिपिड प्रोफाइल पाया गया जो कि सामान्यत: उन पुरुषों के खून में पाया जाता है जिन्हें कि डायबिटीज नहीं होता है। शोधकर्ताओं का यह भी कहना था कि अंडे के सेवन से ब्लड शुगर लेवल कम ही रहता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
क्या होता है टाइप-2 डायबिटीज?
टाइप-2  मधुमेह में शरीर इंसुलिन नहीं बना पाता है या यूं कह लें कि कोशिकाओं और इंसुलिन में किसी प्रकार की परस्पर प्रतिक्रया नहीं हो पाती है। टाइप-1 की तुलना में टाइप-2 डायबिटीज अधिक लोगों में पाया जाता है। यू.के में 90 प्रतिशत व्यस्कों को टाइप-2 डायबिटीज होता है। यह एक ऐसी प्रगतिशील स्थिति है जो धीरे-धीरे विकसित होती है। इसके लक्षणों पर आसानी से ध्यान नहीं दिया जा सकता है। अधिक बार मूत्र आना, शुष्क मुँह, सामान्य से अधिक प्यास लगना, थकान, खुजली, धुंधली दृष्टि, वजन में धीरे-धीरे वृद्धि आदि इसके लक्षण हैं।
 
 
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