फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनुच्छेद-370 से मुक्ति के दो साल: 130 आतंकी कमांडरों समेत 459 दहशतगर्दों का सफाया, युवाओं ने आतंकवाद से की तौबा

Thu, 05 Aug 2021 09:09 AM IST
प्रशांत कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
विज्ञापन
1 of 6
आतंकियों के खिलाफ मोर्चा संभालते सुरक्षाबल - फोटो : साकिब नबी
पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से लगभग हर दिन आतंकियों के लिए काल साबित हो रहा है। पिछले दो वर्षों में घाटी में 130 टॉप आतंकी कमांडरों समेत 459 दहशतगर्दों को मार गिराने में सुरक्षाबलों को सफलता प्राप्त हुई है। सुरक्षाबलों की सख्ती से 149 आतंकियों ने या तो सरेंडर किया है या वे जिंदा पकडे़ गए हैं। 

दो साल में स्थानीय आतंकियों की भर्ती में भी बहुत कमी देखने को मिली है। पहले आतंकियों के जनाजों से 5 से 10 स्थानीय लड़के आतंकवाद में शामिल होने के लिए निकलते थे। 370 से आजादी के बाद 300 स्थानीय युवाओं ने आतंकवाद का रास्ता अपनाया है।  कश्मीर से सटी एलओसी से 2019 और 2020 में 166 घुसपैठ के प्रयास हुए हैं जिनमें से 19 को नाकाम बनाया गया। 2021 में घुसपैठ की दो कोशिशों को नाकाम बनाया गया। पांच अगस्त 2020 को एक साल पूरा होने तक विभिन्न तंजीमों के सरगनाओं समेत 180 से ज्यादा आतंकी ढेर किए गए थे। घाटी में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की कमर लगभग टूट गई।
विज्ञापन

2 of 6
आतंकियों के खिलाफ मोर्चा संभालते सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
एक साल के दौरान आतंकी वारदातों में काफी कमी देखने को मिली। पुलवामा में हिजबुल मुजाहिदीन के कुख्यात दहशतगर्द रियाज नायकू को ढेर करना सुरक्षाबलों की सबसे बड़ी कामयाबी थी। इसके बाद उसके करीबी और अलगाववादी अशरफ सेहरई के बेटे जुनैद सेहरई समेत हिजबुल के अन्य कई बड़े आतंकी उमर फय्याज उर्फ  हम्माद खान, जहांगीर, वसीम अहमद वानी और मसूद भट भी मारे गए। अंसार गजवा तुल हिंद (एजीएच) के बुरहान कोका, लश्कर-ए-तैयबा के बशीर कोका, हैदर, इशफाक रशीद, जैश के सज्जाद अहमद डार, सज्जाद नवाबी, कारी यासिर और पाकिस्तानी आईईडी एक्सपर्ट अबू रहमान उर्फ फौजी भाई को भी मार गिराया गया। 

 
विज्ञापन

3 of 6
आतंकियों के खिलाफ मोर्चा संभालते सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार 
अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में आतंकी घटनाओं में बड़ी कमी ही नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में भी सुधार देखने को मिला। सूत्रों के अनुसार पुलिस की ओर से गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में कहा गया था कि 8 जुलाई 2016 को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद छह महीने में करीब 2500 हिंसक घटनाएं हुई थीं। इनमें 117 नागरिक मारे गए। वहीं पांच अगस्त 2019 को राज्य का विशेष दर्जा वापस लेने के बाद 196 हिंसक घटनाएं जरूर हुईं, लेकिन इनमें एक भी मौत नहीं हुई। आंकड़ों के आधार पर यह करीब 78 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। 

 

4 of 6
आतंकियों के खिलाफ मोर्चा संभालते सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
कश्मीर में सुरक्षाबलों को मिली खुली छूट 
अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षाबलों को फ्री हैंड मिला। हालांकि, शुरुआत के दो-तीन महीनों में कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं हुआ। त्राल में गुज्जर भाइयों की हत्या करने वाले आतंकियों को मारा गया। 2020 के पहले सात महीने में 150 आतंकी मारे गए जबकि 2019 में इस अवधि में 126 आतंकी ढेर किए गए थे। 2019 में 188 आतंकी वारदातें हुई थीं, जबकि 2020 में इनकी संख्या 120 रह गई। 2019 में 51 ग्रेनेड हमलों की तुलना में 2020 में 21 ग्रेनेड हमले हुए। 2019 में 23 नागरिक मारे गए थे जबकि 2020 में 22 की मौत हुई है। 2019 में आतंकी वारदातों में 75 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे, जबकि इस साल अब तक 36 जवान शहीद हुए।
विज्ञापन

5 of 6
आतंकियों के खिलाफ मोर्चा संभालते सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
युवाओं ने छोड़ा आतंकवाद का रास्ता
अनुच्छेद 370 हटने के एक साल के भीतर कई कश्मीरी युवाओं ने आतंकवाद से तौबा कर ली। 2021 में जुलाई तक सिर्फ 67 युवा आतंकी संगठनों में भर्ती हुए। 2019 में पहले सात महीने में यह संख्या 105 थी। अगस्त 2019 से अगस्त 2020 के बीच करीब 100 युवा आतंकी बने जो वर्ष 2019 के 172 की तुलना में बहुत कम रहा। इसका मुख्य कारण आतंकी जनाजों में भीड़ का शामिल नहीं होना माना जा रहा है। दरअसल, पुलिस ने मारे गए आतंकियों के शव उनके परिवार वालों को नहीं सौंपे। भले ही उसके पीछे कोविड 19 को कारण बताया गया, लेकिन सरकार की रणनीति भीड़ को जनाजों से दूर रखने की थी जिसमें वो काफी हद तक कामयाब भी रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
आतंकियों के खिलाफ मोर्चा संभालते सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
आतंकियों से बरामद हथियार
  • 2015    91
  • 2016    100
  • 2017    129
  • 2018    76
  • 2019    90
  • 2020    171
  • 2021    115
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें