डल झील में शिकारे का आनंद लेते हुए पर्यटक
- फोटो : बासित जरगर
दशकों बाद ऐसी रौनक
घाटी ने तीन दशक तक आतंकवाद का दंश झेला है। कभी 2 हजार हाउसबोट होती थी। झेलम, चिनाब, नगीन में ये हाउसबोट होती थीं, लेकिन पर्यटकों की कमी से धीरे-धीरे ये कम होती गईं। अब डल में ही हाउसबोट हैं। इनमें भी 500 ही चल रही हैं। लेकिन अब फिजा बदली है। दो महीनों तक हाउसबोट में बुकिंग फुल है। पर्यटकों का खासा उत्साह नजर आ रहा है। - मंजूर पख्तून, प्रधान हाउसबोट एसोसिएशन कश्मीर