कालीन को अंतिम रूप देते हुए
- फोटो : बासित जरगर
शिल्प विक्रेता फैयाज अहमद शाह ने कहा, यह हमारे देश के ही एक व्यक्ति का ऑर्डर था। हमें कई चीजों पर अपना दिमाग लगाना पड़ा, क्योंकि बुनाई के लिए एक विशाल करघे की जरूरत थी। यह बड़ी चुनौती थी और कारीगरों की मेहनत से आखिरकार यह पूरा हो गया। उन्हें यकीन है कि इसे विदेशों में बेचा जाएगा और भविष्य में हम इससे भी बड़ा कुछ बनाएंगे।