कश्मीर घाटी में उगने वाले केसर की महक विदेशों में भी फै ल गई है। वहां से भी इसकी मांग आनी शुरू हो गई है। इसकी तुड़ाई का काम अक्तूबर माह से शुरू होता है और नवंबर में देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों में भेजा जाता है। विदेशों से मांग का कारण जीआई टैगिंग भी है। पहले केसर को बिचौलियों के माध्यम से बेचा जाता था। ऐसे में किसानों को केसर की पूरी कीमत नहीं मिल पाती थी। मगर, अब केसर को किसान सीधा मंडियों के माध्यम से बेचते हैं। ऐसे में तय कीमत भी उनके खातों में आ रही है। मौजूदा समय में होलैंड, स्विट्जरलैंड, अमेरिका, कैनेडा और अफगानिस्तान समेत अन्य देशों से डिमांड आ रही है। इस बार पचास फीसदी केसर विदेशों में भेजा जाएगा। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी।