हिंसा के केंद्र रहे दक्षिण कश्मीर में सेना एक अलग किरदार में है। आतंक रोधी अभियान और हिंसक घटनाआें पर अंकुश लगाने के अलावा सेना की ओर से बच्चों को मुफ्त कोचिंग दी जा रही है।
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बाकायदा स्थानीय स्तर पर शिक्षकों को तलाशकर स्कूल खुलवाने या फिर सामुदायिक स्तर पर कक्षाएं लगाने को प्रेरित किया जा रहा है। खास बात है कि अभियान को सफलता भी मिल रही है।
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Army Goodwill School
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उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सेना ने आपरेशन काम डाउन चलाकर कई हिंसा ग्रस्त इलाकों में शांति बहाली को मुमकिन कर दिखाया। इस अभियान के तहत उपद्रव वाले इलाकों में सड़कों और मोहल्लों पर उपद्रवियाें के प्रभाव को खत्म किया गया।
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इससे वाहनों की आवाजाही आसान हो गई। जनजीवन भी सामान्य होने लगा। सेना की विक्टर फोर्स के जनरल आफिसर इन कमांड (जीओसी) मेजर जनरल अशोक नरूला ने अभियान को सेना का महत्वपूर्ण मिशन बताया है। चार महीनाें की हिंसा के बीच 30 से अधिक स्कूलों में आगजनी से उपजे माहौल में स्कूली शिक्षा की बहाली पर नरूला कहते हैं, वे खुद दो बच्चों के पिता हैं। बच्चों की शिक्षा कितनी मायने रखती है वे बखूबी जानते हैं।
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मेजर जनरल ने बताया कि पहलगाम में सेना के गुडविल स्कूल में 292 बच्चों को शिक्षक पढ़ा रहे हैं। हिंसक हालात से इतर इन बच्चों ने अपना सिलेबस पूरा करने के साथ ही उसे रिवाइज भी कर लिया है।
बच्चों ने ईद से लेकर स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी हिस्सा लिया। यही वजह है कि अन्य अभिभावक भी अपने बच्चों को सेना के स्कूल चलो अभियान का हिस्सा बनाने के इच्छुक हैं।