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श्रीनगर: हजरतबल दरगाह में नमाजियों ने किए मु-ए-मुकद्दस के दीदार, दुआ के लिए उठे हजारों हाथ

Fri, 29 Sep 2023 05:34 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

पैगंबर मोहम्मद की जयंती ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का पर्व कश्मीर में धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। श्रीनगर के ऐतिहासिक हजरतबल दरगाह में सबसे बड़ी सभा आयोजित हुई।
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मु-ए-मुकद्दस के दीदार के लिए पहुंचे लोग - फोटो : बासित जरगर
पैगंबर मोहम्मद की जयंती ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का पर्व कश्मीर में धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। श्रीनगर के ऐतिहासिक हजरतबल दरगाह में सबसे बड़ी सभा आयोजित हुई। नमाजियों को सामूहिक प्रार्थना के बाद पैगंबर मोहम्मद के पवित्र अवशेष मु-ए-मुकद्दस के दीदार करने का अवसर मिला।
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हजरतबल दरगाह में एकत्रित हुए हजारों लोग - फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर शहर में स्थित हजरतबल एक प्रसिद्ध दरगाह है। जोकि मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। मान्यता है कि इसमें पैगंबर मोहम्मद साहब की पवित्र बाल रखा हुआ है। जिससे लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। इसे मो-ए-मुकद्दस कहा जाता है।
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मु-ए-मुकद्दस का दीदार कराते हुए - फोटो : बासित जरगर
मु-ए-मुकद्दस के दीदार के लिए शुक्रवार को हजारों की संख्या में लोग इकट्ठे हुए। पवित्र अवशेष की झलक पाते ही लोगों ने दुआएं अपने परिवार और प्रदेश के सुख, समृद्धि और अमन के लिए दुआ की।

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श्रीनगर में नमाज अदा करते हुए नमाजी - फोटो : बासित जरगर
हजरतबल दरगाह के अलावा, खानकाह-ए-मौला, असरी शरीफ कलाशपोरा, जेनब साहिब सौरा, लाल बाजार, पिंजुरा शोपियां, खिरम सिरहामा सहित अन्य मस्जिदों में बड़ी सामूहिक प्रार्थनाएं आयोजित की गई। इससे पहले ईद ए मिलाद की पूर्व संध्या पर हजारों श्रद्धालु हजरतबल दरगाह पर पहुंचे।
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हजरतबल दरगाह - फोटो : बासित जरगर
कश्मीरी भाषा में बल शब्द का अर्थ जगह होता है। इस लिहाज से हजरतबल शब्द का अर्थ हजरत (मोहम्मद) की जगह है। फारसी भाषा में 'बाल' को 'मू' या 'मो' कहा जाता है। इसलिए हजरतबल में सुरक्षित बाल को 'मो-ए-मुकद्दस' या 'मो-ए-मुबारक' (पवित्र बाल) भी कहा जाता है।

जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग यहां आते हैं। मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद साहब के वंशज मदीना से चलकर भारत आए और कर्नाटक राज्य के बीजापुर क्षेत्र में बसे। वह अपने साथ पवित्र बाल को भी लेकर आए। सन 1700 में पवित्र बाल कश्मीर लाया गया। 
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