नरेंद्र मोदी को वैसे तो शब्दों का सौदागर कहा जाता है लेकिन कई बार उनकी भी जबान फिसली है। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए उनके कुछ बड़े विवादित बयान-
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यूपी लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन अखिलेश सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर गांव में कब्रिस्तान बनता है तो श्मशान भी बनना चाहिए। रमजान में बिजली आती है, तो दीवाली में भी आनी चाहिए। भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री के इस बयान की विपक्षियों ने बहुत निंदा की थी।
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इस साल की 6 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी की जबान फिसल गई थी। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में कहा था कि देश की एकता के लिए महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया। आप बताएं कि आपके घरों से कौन आया? वहां से तो एक कुत्ता भी नहीं आया। इसके जवाब में नरेंद्र मोदी ने कहा था। इतिहास किताबों में ही रहे तो समाज को प्रेरणा नहीं मिलता। उस समय हम थे या नहीं थे, हमारे कुत्ते भी थे या नहीं थे। नहीं पता। औरों के कुत्ते हो सकते हैं। हम कुत्तों वाली परंपरा में पले-बढ़े नहीं है।
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फरवरी में सदन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित बयान दे डाला था। उन्होंने कहा था कि मनमोहन सिंह के समय में इतने घोटाले हुए। इतना पैसा इधर उधर हुआ। उन पर एक दाग नहीं लगा। राजनेताओं को बाथरूम में रेनकोर्ट पहनकर नहाने की कला डॉक्टर मनमोहन सिंह से सीखना चाहिए।
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15 फरवरी 2015 में वो विदेश में भी कांग्रेस को निशाना बनाने से नहीं चूके। कनाडा में उन्होंने कहा कि हमारा मिशन है स्किल इंडिया जबकि इससे पहले भारत की पहचान थी स्कैम इंडिया।
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पिछले साल 8 फरवरी को उन्होंने कोलकाता ट्रेजडी को भगवान का इशारा बताया था। उन्होंने कहा था कि जैसी सरकार चलाई है ये भगवान का इशारा है। आज ये ब्रिज टूटा है, कल ये सरकार पूरा बंगाल खत्म कर देगी।
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पिछले साल 9 मई को केरल में जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केरल की स्थिति की तुलना सोमालिया से कर दी थी।
मई 2015 में विदेश यात्रा के दौरान उनके एक बयान पर जमकर हंगामा हुआ था। उन्होंने कहा था कि पहले आपको भारतीय पैदा होने पर शर्म महसूस होती थी। मगर अब आपको अपने देश का प्रतिनिधित्व करने में गर्व महसूस होता है।