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भाजपा की राजनीति में भी तनकर खड़ा है वंशवाद का बरगद, ये बड़े नेता हैं शामिल

Tue, 02 Apr 2019 05:53 PM IST
Prabudhh Jain चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा में वंशवाद - फोटो : Amar Ujala
चुनाव करीब आते ही राजनीतिक दलों के बीच मुद्दों को लेकर पहले जुबानी महामुकाबला होता है, फिर शुरू होता है आरोप-प्रत्यारोप का दौर। इसी बीच एक मुद्दा आता है वंशवाद का, जिसे लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर हमलावर नजर आती हैं। वंशवाद के मामले में भाजपा लगातार कांग्रेस को घेरती रही है। तो क्या भाजपा में वंशवाद नहीं है या दूर से नजर नहीं आता। आगे की तस्वीरों में देखिए कि कांग्रेस के वंशवाद पर सवाल खड़े करने वाली पार्टी खुद इससे कितनी अछूती है।
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कल्याण सिंह-राजवीर सिंह - फोटो : Amar Ujala
कल्याण सिंह-राजवीर सिंह
भाजपा में वंशवाद की बात करें तो सबसे पहले वरिष्ठ नेता और वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह का नाम सामने आता है। कल्याण सिंह इससे पहले 1991 और 1997 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उनकी दो संतानें हैं, एक पुत्र और एक पुत्री। 
कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह आगामी चुनावों में दूसरी बार एटा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर किस्मत आजमाएंगे। राजवीर 2014 में भी इसी सीट से चुनाव लड़ कर भारी अंतर से जीत चुके हैं। 2009 में यहीं से कल्याण सिंह लोकसभा पहुंचे थे। इस बार शुरू से ही राजवीर को टिकट मिलने की संभवना थी। कुछ दिन पहले कल्याण सिंह के एटा दौरे के बाद से ही तय हो गया था कि राजवीर इस बार भी एटा से ही मैदान में उतरने जा रहे हैं। एटा में बड़ी संख्या में कल्याण सिंह के समर्थक हैं, जिसका फायदा राजवीर को मिलता है।
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वसुंधरा राजे- दुष्यंत सिंह - फोटो : Amar Ujala

वसुंधरा राजे- दुष्यंत सिंह

1984 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का हिस्सा बनी वसुंधरा राजे, 1985-87 के बीच भाजपा युवा मोर्चा राजस्थान की उपाध्यक्ष भी रहीं। 1987 में वो राजस्थान प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष और 1998-1999 में अटलबिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में विदेश राज्यमंत्री बनीं। इसके बाद वो दिसंबर 2003 से दिसंबर 2008 तक और दिसंबर 2013 से 2018 तक राजस्थान की मुख्यमंत्री रहीं। उनके बेटे दुष्यंत 2004 में पहली बार झालावाड़ लोकसभा सीट से राजनीति मे मैदान में उतरे थे। उस समय इस सीट से लगातार पांच बार सांसद रह चुकीं उनकी मां वसुंधरा सूबे की मुख्यमंत्री थीं। उन्होंने कांग्रेस के संजय गुर्जर को 81 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। 2014 का चुनाव दुष्यंत सिंह के लिए बेहद आसान रहा। चुनाव प्रचार की कमान मां वसुंधरा राजे के हाथ में थी, जिसका नतीजा हुआ कि दुष्यंत 2 लाख 80 हजार के बड़े अंतर से चुनाव जीते। 

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राजनाथ सिंह-पंकज सिंह - फोटो : Amar Ujala

राजनाथ सिंह-पंकज सिंह

भाजपा के लोकप्रिय चेहरे और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को भी अपने पिता की राजनीतिक पकड़ का फायदा मिलता रहा है। पंकज सिंह नोएडा से विधायक और भाजपा के उत्तर प्रदेश के महासचिव हैं। राजनाथ, पार्टी का बड़ा नाम और बड़ा चेहरा हैं। जिसका फायदा पंकज को भी मिलता रहा है।
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प्रमोद महाजन- पूनम महाजन - फोटो : Amar Ujala

प्रमोद महाजन- पूनम महाजन

महाराष्ट्र समेत भारत के पश्चिमी क्षेत्र में लोकप्रिय प्रमोद महाजन भाजपा के उन नेताओं में से एक थे जिन्होंने किसी राजनीतिक आधार के बिना ही खुद अपना राजनीतिक विकास किया। उन्होंने मुंबई उत्तर पश्चिम से सांसद, केन्द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और रक्षा मंत्री के तौर पर भी सेवाएं दी थीं। इसके अलावा उन्होंने दो बार संसदीय कार्य मंत्री का भी कार्यभार संभाला। 
इन चुनावों में उनकी बेटी पूनम महाजन एक बार फिर मुंबई उत्तर-मध्य सीट से बतौर भाजपा उम्मीदवार मैदान में उतरने जा रही हैं। कांग्रेस की तरफ से इस सीट पर पूर्व राजनेता सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त को उतारा गया है। 2014 के चुनाव में पूनम महाजन ने प्रिया दत्त को हरा कर इस सीट पर जीत हासिल की थी।
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गोपीनाथ मुंडे- प्रीतम मुंडे - फोटो : Amar Ujala

गोपीनाथ मुंडे- प्रीतम मुंडे

इस लिस्ट में महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री गोपीनाथ मुंडे का नाम भी शामिल है। ओबीसी वर्ग से आने वाले मुंडे का महाराष्ट्र में बड़ा जनाधार था। पांच बार के विधायक रहे मुंडे महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के तगड़े दावेदार थे। महाराष्ट्र में कई वर्षों तक भाजपा के लिए मेहनत करने वाले मुंडे को मोदी सरकार ने 2014 में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बनाया था। लेकिन मंत्री बनने के कुछ रोज बाद ही यानी 3 जून 2014 को दिल्ली में हुई एक कार दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। 

आगामी चुनावों में भाजपा की तरफ से गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे महाराष्ट्र के ही बीड लोकसभा सीट से मैदान में उतर रही हैं। 2014 में पिता की असमय मौत के बाद बीड में हुए उपचुनाव में प्रीतम मुंडे ने चुनाव लड़ा था और भारी मतों से जीत हासिल की थी। इस बार भी भाजपा को इसका फायदा मिलना निश्चित है।
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प्रेम कुमार धूमल-अनुराग ठाकुर - फोटो : Amar Ujala

प्रेम कुमार धूमल-अनुराग ठाकुर

प्रेम कुमार धूमल हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और उनके बेटे अनुराग ठाकुर भी भाजपा की राजनीति में सक्रिय भूमिका में नजर आते हैं। प्रेम कुमार धूमल 1989 और 1991 में हमीरपुर से सांसद के साथ-साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 1998 और 2007 में दो बार राज्य के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाल चुके प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर वर्तमान में हमीरपुर से ही सांसद हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा अनुराग को ही अपना दावेदार चुनेगी।

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मेनका गांधी-वरुण गांधी - फोटो : Amar Ujala

मेनका गांधी-वरुण गांधी

गांधी परिवार की सदस्य और संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी ने पारिवारिक विवाद के कारण भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। राजनीति में कई पदों की जिम्मेदारी संभाल चुकी मेनका गांधी साल 2014 में पीलीभीत से और उनके बेटे वरुण गांधी सुल्तानपुर से सांसद चुने गए थे। इस बार दोनों की सीट में अदला-बदली कर के भाजपा ने मैदान में उतारा है। मेनका सुल्तानपुर से चुनाव लड़ रहीं हैं, वहीं वरुण गांधी को पीलीभीत से टिकट दिया गया है। 

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हुकुमदेव नारायण यादव-अशोक यादव - फोटो : Amar Ujala

हुकुमदेव नारायण यादव-अशोक यादव

भाजपा के वरिष्ठ नेता हुकुमदेव नारायण यादव 60 के दशक से ही राजनीति में सक्रिय हैं। 2014 में  चुनाव जीत कर उन्होंने अपने पांचवें  संसदीय कार्यकाल का कार्यभार संभाला। हुकुमदेव वर्तमान में भाजपा की सामान्य प्रयोजन समिति के सदस्य हैं। आगामी चुनावों में उनके चुनाव नहीं लड़ने के फैसले के बाद उनके बेटे अशोक कुमार को भाजपा ने मधुबनी लोकसभा के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। अशोक यादव केवटी विधानसभा से तीन बार भाजपा के टिकट पर विधायक भी निर्वाचित हो चुके हैं। 

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स्वामी प्रसाद मौर्य-संघमित्रा मौर्य - फोटो : Amar Ujala

स्वामी प्रसाद मौर्य-संघमित्रा मौर्य

वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य भी अपनी अगली पीढ़ी को राजनीति से दूर नहीं रख पाए। 2009 में हुए आम चुनावों में बसपा प्रत्याशी रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के कारण ही भाजपा सरक कर तीसरे स्थान पर चली गई थी, लेकिन बाद में मायावती से मतभेदों के कारण स्वामी भाजपा में शामिल हो गए। वे पडरौना विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। उनके एक पुत्र अशोक मौर्य और एक पुत्री संघमित्रा मौर्य हैं। 
इस बार भाजपा, स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य को बदायूं लोकसभा सीट से उतार रही है। मौर्य-शाक्य वर्ग में स्वामी प्रसाद मौर्य प्रभावशाली नेताओं के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं, जिसका सीधा फायदा भाजपा को बदायूं में संघमित्रा मौर्य के माध्यम से मिलेगा। 
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एकनाथ खड़से-रक्षा खड़से - फोटो : Amar Ujala

एकनाथ खड़से-रक्षा खड़से

वरिष्ठ भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री एकनाथ खड़से भाजपा में पार्टी के शुरूआती समय से हैं। साल 2013 में उनके बेटे निखिल खड़से ने आत्महत्या कर ली थी। हालांकि निखिल की मौत के पहले से ही एकनाथ खड़से की बहू रक्षा खड़से राजनीति में सक्रिय हो चुकी थीं। साल 2018 में कई गंभीर विवादों और आरोपों में खड़से की कथित संलिप्तता के कारण खबर आ रही थी कि वो पार्टी छोड़ सकते हैं, हालांकि ऐसा हुआ नहीं। अब एकनाथ की राजनीतिक विरासत को रक्षा ही आगे बढ़ा रहीं हैं। रक्षा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर महाराष्ट्र के रावेर सीट से चुनाव लड़ा और राकांपा के दिग्गज नेता मनीष जैन को रिकॉर्ड 4 लाख वोटों से हराया। मालूम हो कि खड़से की पत्नी मंदा जिला दुग्ध संघ और बेटी रोहिणी जलगांव जिला बैंक की अध्यक्ष हैं।
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