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Year Ender 2021: पंजाब से उठे किसान आंदोलन को हरियाणा से मिला बल, राजनीतिक हलचल हुई तेज, कईं बार बनी टकराव की स्थिति

Wed, 29 Dec 2021 05:05 PM IST
भूपेंद्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरियाणा
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किसान आंदोलन - फोटो : फाइल फोटो
तीन कृषि कानूनों के विरोध में उठे किसान आंदोलन की शुरुआत भले ही पंजाब से हुई थी, लेकिन आंदोलन को बल हरियाणा से मिला। हरियाणा से आंदोलन को जो मजबूती मिली वह इतिहास में दर्ज हो गई। किसान आंदोलन का केंद्र भी हरियाणा का टीकरी और कुंडली बॉर्डर ही रहा। 28 जनवरी के बाद राकेश टिकैत का आंदोलनकारी नेताओं में कद बढ़ा तो लगा कि आंदोलन का मुख्य मंच अब गाजीपुर स्थानांतरित हो जाएगा, लेकिन इसके बाद भी संयुक्त किसान मोर्चा के तमाम छोटे-बड़े फैसले हरियाणा के कुंडली बॉर्डर से ही लिए गए।

आंदोलन के दौरान एक बार सीमाओं पर किसानों की संख्या जरूर कम पड़ गई, लेकिन हरियाणा में किसानों की हलचल सालभर कायम रही। चाहे वह साल की शुरुआत में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का विरोध करके उसे रद्द करवाने की बात हो या फिर आंदोलन खत्म होने से पहले हिसार में राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा के विरोध की। भाजपा-जजपा के नेताओं को बार-बार किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। आंदोलन में किसानों ने सर्दी-गर्मी-बारिश सभी ऋतुएं देखी। वहीं कोरोना महामारी के दौरान भी किसान आंदोलन स्थल पर डटे रहे। 

इस दौरान हरियाणा में राजनीतिक हलचल भी बढ़ी। कांग्रेस सदन में अविश्वास प्रस्ताव भी लाई। लेकिन वह गठबंध के आगे टीक नहीं सका। आंदाेलन के दाैरान कईं बार टकराव की स्थिति भी बनी। 26 जनवरी की घटना ने भी आंदोलन को एक बार के लिए कमजोर किया। लेकिन राकेश टिकैत के भावुक होन के बाद हरियाणा के किसान फिर से आंदोलन में मजबूती से डट गए। 

किसान आंदोलन के दौरान पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक हरियाणा में 276 केस दर्ज हुए जिसमें दो हजार के करीब नामजद व 48 हजार के करीब अज्ञात किसानों पर केस दर्ज किया गया था। हालांकि आंदोलन स्थगित करने के समझौते के अनुसार सरकार ने केस रद्द करने शुरू कर दिए हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के तीन कृषि कानूनों को रद्द करने व मांगों पर सहमति के बाद 11 दिसंबर को किसानों की भी आंदोलन स्थगित कर फतेह मार्च निकालते हुए अपने घरों को लौट गए। आंदोलन के दौरान किसान नेताओं का कद भी बढ़ा। इनमें गुरनाम सिंह चढूनी, सुरेश कौथ, अभिमन्यु कोहाड़ के अलावा कुछ अन्य यूवा नेता शामिल है।
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करनाल के कैमला गांव में किसानों ने सीएम के कार्यक्रम का किया था विरोध। - फोटो : एएनआई (अमर उजाला)
करनाल में आयोजन स्थल पर नहीं उतरने दिया सीएम का हेलिकॉप्टर, रद्द करना पड़ा कार्यक्रम
हरियाणा के करनाल जिले के गांव कैमला में 10 जनवरी 2021 को स्थानीय विधायक हरविंदर कल्याण ने किसान महापंचायत का आयोजन रखा। इसमें मुख्यमंत्री, भाजपा अध्यक्ष सहित कई नेताओं को शिरकत करनी थी। मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर से आने वाले थे, लेकिन आंदोलन कर रहे किसानों ने कार्यक्रम का विरोध किया। आयोजन स्थल पर पहुंचने के सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया गया, लेकिन किसान खेतों के रास्ते से आंदोलन स्थल पर पहुंच गए। किसानों ने सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए कार्यक्रम के लिए सजाया मंच तोड़ दिया और बैनर फाड़ने के साथ साउंड सिस्टम, झंड़े व कुर्सियां उठाकर फेंक दीं। हैलीपैड पर भी किसानों ने कब्जा कर लिया था। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियां भांजी। कार्यक्रम में भाग लेने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को हेलीकॉप्टर से पहुंचना था लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर स्थिति को देखते हुए विशेष टीम ने उतरने की इजाजत नहीं दी। बवाल के बाद कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। 
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बसताड़ा टोल प्लाज पर धरना देते आंदोलनकारी किसान। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
लगभग सभी टोल करवाए फ्री, स्थानीय धरनों का रहा विशेष योगदान
किसान आंदोलन के दौरान एसकेएम के आह्वान पर पंजाब की तर्ज पर भी हरियाणा में किसानों ने टोल फ्री करवाकर सभी टोल पर स्थानीय धरने लगाए। सभी स्थानीय धरनों पर बैठे किसानों ने एसकेएम के हर फैसले को अपने-अपने क्षेत्र में मजबूती से लागू कर करवाया। चाहे वह भारत बंद का आह्वान हो, या रेल रोकने का या फिर रोड जाम करने का। स्थानीय धरने लगने से वो किसान भी आंदोलन में शामिल हो सके जो सीमाओं पर नहीं पहुंच पाए थे।

खापों का रहा विशेष सहयोग
किसान आंदोलन के दौरान हरियाणा की खाप पंचायतों का भी विशेष सहयोग रहा। खाप पंचायतें खुलकर आंदोलन के समर्थन में आई और एसकेएम के निर्णयों के अनुसार चलने का फैसला लिया। हरियाणा में आंदोनल के दौरान महापंचायतों में भी खापों का योगदान रहा।

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मृतक लखबीर और गम में डूबी पत्नी जसप्रीत। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)
टीकरी बॉर्डर पर दुष्कर्म और आदमी को जिंदा जलाने व कुंडली बॉर्डर पर निर्मम हत्या ने लगाया आंदोलन पर दाग
किसान आंदोलन के दौरान कुछ घटनाएं ऐसी भी हुई जिससे आंदोलन पर दाग लगा। टीकरी बॉर्डर पर आंदोलन स्थल पर ही बंगाल की युवती से दुष्कर्म का मामला काफी चर्चा में आया। इसमें किसान नेताओं के कहने पर लड़की के पिता ने केस दर्ज करा दिया। वहीं आंदोलन स्थल पर ही हरियाणा के कुछ आंदोलनरत किसानों द्वारा एक स्थानीय निवासी को जिंदा जला दिया गया। यह घटना भी आंदोलन को धक्का लगाने वाली थी। इसके बाद सिंघु बॉर्डर पर बेअदबी के आरोप में निहंगों ने जिस तरह से हाथ काटकर लखबीर नामक व्यक्ति की निर्मम हत्या की और उसे बैरिकेड पर लटकाया गया, यह भी आंदोलन की छवि को धूमिल करने वाला कदम था। 

कोरोना काल में बॉर्डरों से ऑक्सीजन सप्लाई हुई बाधित
किसान आंदोलन के कारण बहादुरगढ़ व सोनीपत में दिल्ली की सीमाएं बंद थी। इस कारण से आपात सेवाएं बाधित हुई। इस दौरान ऑक्सीजन सप्लाई में भी बाधा आई। रास्ते बंद रहने के कारण दिल्ली जाने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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रोहतक के किलोई में किसानों ने मंदिर में भाजपा नेताओं को बंधक बनाया था, इसके बाद भाजपा नेता मनीष ग्रोवर ने हाथ जोड़े तो किसान शांत हुए। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
नेताओं को झेलना पड़ा बार-बार विरोध
किसान आंदोलन के दौरान भाजना-जजपा नेताओं को बार-बार विरोध झेलना पड़ा। मई में कोविड अस्पताल का अस्पताल के उद्घाटन के बाद किसानों की पुलिस के साथ झड़प हो गई थी, जिसके बाद अनेक किसानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। किसान नेताओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया और बड़े राकेश टीकैत सहित बड़े नेता यहां पहुंचे। बाद में मुकदमे वापस लेने पर सहमति बन गई। इसी प्रकार जींद, फतेहाबाद, सिरसा, अंबाला आदि जिलों में भी निरंतर विरोध जारी रहा व कई बार टकराव की स्थिति बनी। हिसार में सांसद रामचंद्र जांगड़ा के विरोध के दौरान किसान कुलदीप सातरोड़ की तबीयत बिगड़ी तो भी काफी लंबा धरना चला। जजपा नेताओं को तो इस दौरान ज्यादा विरोध झेलना पड़ा। खासकर हिसार, फतेहाबाद, जींद, कैथल, यमुनानगर, सिरसा, अंबाला, रोहतक, चरखीदादरी, भिवानी,  सहित जीटी बेल्ट के जिलों मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सहित जजपा एवं भाजपा नेताओं का जमकर विरोध किया गया। हालांकि दक्षिण हरियाणा और फरीदाबाद, गुरुग्राम क्षेत्र में आंदोलन का असर कम रहा।

भाजपा उपाध्यक्ष मनीष ग्रोवर को दो बार झेलना पड़ा विरोध
हरियाणा के रोहतक जिले में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर को किसान आंदोलन के दौरान दो बार बड़े स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा। पहली बार विरोध तब हुआ जब जुलाई में वह हिसार से किसी कार्यक्रम से लौट रहे थे। उनपर किसानों की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्होंने विरोध कर रही महिलाओं को अश्लील इशारा किया है। इसके विरोध में किसानों ने मनीष ग्रोवर के घर के पास धरना लगा दिया और ग्रोवर से माफी मंगवाने की बात पर अड़ गए। मनीष ग्रोवर का कहना था कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया है  कि वह माफी मांगे, अगर किसी को गलतफहमी हुई है तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। कुछ दिन धरना चलने के बाद हरियाणा के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने आखिरकार हिसार प्रकरण में वहां की प्रदर्शनकारी महिलाओं से माफी मांग ही ली। इसके बाद किसान व अन्य संगठनों ने धरना और महापंचायत खत्म करने का एलान कर दिया। ग्रोवर ने कहा है कि माफी न मांगना उनका निजी स्टैंड था। किसानों के आंदोलन के मामले में उन्होंने पार्टी के आदेश का पालन किया है।

उसके बाद 5 नवंबर को 2021 को एक बार फिर ग्रोवर किसानों के निशाने पर आ गए। किसान आंदोलन के बीच ग्रोवर और तमाम भाजपा नेता सुबह करीब साढ़े नौ बजे किलोई के प्राचीन शिव मंदिर में पीएम नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम देखने पहुंचे। सूचना मिलते ही किसान इकट्ठे होने लगे। सड़कें वाहन लगा कर बंद कर दीं। किसानों का कहना था कि संयुक्त किसान मोर्चा एलान कर चुका है कि आंदोलन के दौरान भाजपा, जजपा नेता गांवों में जाएंगे तो उनका विरोध किया जाएगा। फिर भी ग्रोवर यहां आए। वह इसके लिए माफी मांगे और कहें कि जब तक आंदोलन चल रहा है गांव में नहीं आएंगे। उसके बाद दिन भर हाई-वोल्टेज ड्रामा चला। ऐसा लग रहा था कि पुलिस भाजपाइयों को निकालने के लिए बल प्रयोग कर सकती है। इसी बीच सवा पांच बजे ग्रोवर हुड्डा खाप के नेताओं के साथ मंदिर की बालकनी पर आए और तीन बार बोले कि अब यहां नहीं आउंगा और हाथ जोड़ दिए। फिर पुलिस ने सारा ग्राउंड खाली करवाया और करीब पौने छह बजे भाजपा नेताओं को वहां से निकाला जा सका।
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करनाल के बसताड़ा टोल पर किसानों को धरने से उठाती फोर्स। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)
करनाल में हुआ लाठीचार्ज, एक किसान की मौत का आरोप, किसानों ने घेरा लघुसचिवालय
हरियाणा के करनाल में भाजपा का प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम होना था। किसानों ने इसका विरोध किया यहां बसताड़ा टोल प्लाजा पर पुलिस और किसान भिड़े। पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो किसानों ने जवाब में पत्थर बरसाए। घटनाक्रम में 20 से ज्यादा किसान घायल हो गए। पुलिस ने 30 प्रदर्शनकारी किसानों को हिरासत में भी लिया। इस घटना का पता चलते ही प्रदेशभर में किसानों और उनके समर्थकों ने 15 जिलों में नेशनल हाईवे समेत 47 जगह सड़कों पर जाम लगा दिया। माहौल तनावपूर्ण रहा। साथियों की रिहाई के बाद किसानों ने नेशनल हाईवे-44 से जाम हटाया। इस दौरान एसडीएम आयुष सिन्हा का भी बयान मीडिया में वायरल हुआ। किसानों ने कहा कि लाठीचार्ज में एक किसान की मौत हुई है, इसके बाद किसानों ने करनाल लघुसचिवालय को घेर लिया, यहां एसकेएम के बड़े नेता भी पहुंचे। सरकार ने आखिर किसानों की बात मानी और मृतक किसान के परिवार में नौकरी व मुआवजा और घायलों को मुआवजा दिया गया।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल - फोटो : अमर उजाला
सीएम के बयान पर हुआ विवाद, बाद में मांगी माफी
आंदोलन के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का विवादित बयान सामने आया। किसानों के मामले में मुख्यमंत्री ने शठे शाठयम समाचरेत की कहावत का हवाला दिया । उदाहरण देते हुए उन्होंने डंडे उठाने की बात कही तो सीएम के इस बयान के बाद विपक्ष आक्रामक हो गया। बाद में सीएम ने इस बयान पर माफी मांगते हुए कहा कि वह समाज में टकराव नहीं चाहते।

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विधायक सोमबीर सांगवान का हरियाणा सरकार से समर्थन वापसी का पत्र।  - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)
विधायक सोमबीर सांगवान ने सरकार से लिया था समर्थन वापस
किसान आंदोलन में हरियाणा सरकार की मुश्किलें भी बढ़ी। दादरी से निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान ने पहले पशुधन विकास बोर्ड चेयरमैन के पद से इस्तीफा दिया। फिर 10 दिसंबर 2020 को सरकार से अपना समर्थन भी वापस ले लिया। उनसे पहले महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू सरकार से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर समर्थन वापस ले चुके थे। उन्होंने विधानसभा में भाजपा के पूर्व मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी।

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हरियाणा विधानसभा फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
आंदोलन के नाम पर कांग्रेस लाई अविश्वास प्रस्ताव सरकार ने की जीत हासिल
किसान आंदोलन के दौरान हरियाणा में विपक्षी दल कांग्रेस विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाई। कहा गया कि सदन में ये देखा जाएगा कि कौन किसानों के साथ है और कौन सत्ता के साथ। लेकिन छह घंटे की लंबी चर्चा के बाद सरकार के खिलाफ लाया गया कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव धराशायी हो गया। हरियाणा की मनोहर लाल सरकार को 55 विधायकों का साथ सदन में मिला। वहीं 32 विधायकों ने कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मत किया। 

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हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता को इस्तीफा सौंपते अभय चौटाला। - फोटो : एएनआई (फाइल फाेटाे)
अभय चौटाला ने दिया इस्तीफा, किसानों के नाम पर फिर से जीते चुनाव
जनवरी 2021 के अंतिम सप्ताह में ऐलनाबाद से इनेलो के एकमात्र विधायक अभय सिंह चौटाला ने किसानों के समर्थन में इस्तीफा दे दिया। अभय चौटाला ने कृषि कानून वापस न होने के कारण इस्तीफा दिया। अभय चौटाला ने इस्तीफे के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उपचुनाव लड़ने का फैसला अब ऐलनाबाद की जनता करेगी। उसके बाद दो नवंबर को ऐलनाबाद उपचुनाव में जीत हासिल कर दौबारा विधानसभा पहुंचे। उपचुनाव के दौरान यहां किसान महापंचायत का आयोजन किया गया और राकेश टिकैत ने भी जनता को अभय के पक्ष में वोट करने के संकेत दिए।
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किसान आंदोलन - फोटो : फाइल फोटो
भाईचारे का नारा हुआ मजबूत
किसान आंदोलन के दौरान जब पंजाब के किसान हरियाणा पहुंचे तो हरियाणा ने कंधे से कंधा मिलाकर छोटे भाई की तरह साथ दिया। पंजाब के किसान पूरी तैयारी के साथ आंदोलन में राशन पानी लेकर आए थे, फिर भी हरियाणा की ओर से दूध, लस्सी व राशन-पानी की कोई कमी नहीं रहने दी गई। कुंडली और टीकरी बॉर्डर पर इतने लंबे समय तक साथ रहने के बाद पंजाब और हरियाणा के किसानों में आपसी भाइचारा मजबूत हुआ। साथ ही वेस्ट यूपी के किसानों के साथ भी आपस में आना जाना बढ़ा। इसके अलावा अन्य राज्यों राजस्थान, एमपी आदि के किसानों के साथ भी आपस में प्रेम बढ़ा।
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