रोहतक के किलोई में किसानों ने मंदिर में भाजपा नेताओं को बंधक बनाया था, इसके बाद भाजपा नेता मनीष ग्रोवर ने हाथ जोड़े तो किसान शांत हुए।
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नेताओं को झेलना पड़ा बार-बार विरोध
किसान आंदोलन के दौरान भाजना-जजपा नेताओं को बार-बार विरोध झेलना पड़ा। मई में कोविड अस्पताल का अस्पताल के उद्घाटन के बाद किसानों की पुलिस के साथ झड़प हो गई थी, जिसके बाद अनेक किसानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। किसान नेताओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया और बड़े राकेश टीकैत सहित बड़े नेता यहां पहुंचे। बाद में मुकदमे वापस लेने पर सहमति बन गई। इसी प्रकार जींद, फतेहाबाद, सिरसा, अंबाला आदि जिलों में भी निरंतर विरोध जारी रहा व कई बार टकराव की स्थिति बनी। हिसार में सांसद रामचंद्र जांगड़ा के विरोध के दौरान किसान कुलदीप सातरोड़ की तबीयत बिगड़ी तो भी काफी लंबा धरना चला। जजपा नेताओं को तो इस दौरान ज्यादा विरोध झेलना पड़ा। खासकर हिसार, फतेहाबाद, जींद, कैथल, यमुनानगर, सिरसा, अंबाला, रोहतक, चरखीदादरी, भिवानी, सहित जीटी बेल्ट के जिलों मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सहित जजपा एवं भाजपा नेताओं का जमकर विरोध किया गया। हालांकि दक्षिण हरियाणा और फरीदाबाद, गुरुग्राम क्षेत्र में आंदोलन का असर कम रहा।
भाजपा उपाध्यक्ष मनीष ग्रोवर को दो बार झेलना पड़ा विरोध
हरियाणा के रोहतक जिले में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर को किसान आंदोलन के दौरान दो बार बड़े स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा। पहली बार विरोध तब हुआ जब जुलाई में वह हिसार से किसी कार्यक्रम से लौट रहे थे। उनपर किसानों की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्होंने विरोध कर रही महिलाओं को अश्लील इशारा किया है। इसके विरोध में किसानों ने मनीष ग्रोवर के घर के पास धरना लगा दिया और ग्रोवर से माफी मंगवाने की बात पर अड़ गए। मनीष ग्रोवर का कहना था कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया है कि वह माफी मांगे, अगर किसी को गलतफहमी हुई है तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। कुछ दिन धरना चलने के बाद हरियाणा के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने आखिरकार हिसार प्रकरण में वहां की प्रदर्शनकारी महिलाओं से माफी मांग ही ली। इसके बाद किसान व अन्य संगठनों ने धरना और महापंचायत खत्म करने का एलान कर दिया। ग्रोवर ने कहा है कि माफी न मांगना उनका निजी स्टैंड था। किसानों के आंदोलन के मामले में उन्होंने पार्टी के आदेश का पालन किया है।
उसके बाद 5 नवंबर को 2021 को एक बार फिर ग्रोवर किसानों के निशाने पर आ गए। किसान आंदोलन के बीच ग्रोवर और तमाम भाजपा नेता सुबह करीब साढ़े नौ बजे किलोई के प्राचीन शिव मंदिर में पीएम नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम देखने पहुंचे। सूचना मिलते ही किसान इकट्ठे होने लगे। सड़कें वाहन लगा कर बंद कर दीं। किसानों का कहना था कि संयुक्त किसान मोर्चा एलान कर चुका है कि आंदोलन के दौरान भाजपा, जजपा नेता गांवों में जाएंगे तो उनका विरोध किया जाएगा। फिर भी ग्रोवर यहां आए। वह इसके लिए माफी मांगे और कहें कि जब तक आंदोलन चल रहा है गांव में नहीं आएंगे। उसके बाद दिन भर हाई-वोल्टेज ड्रामा चला। ऐसा लग रहा था कि पुलिस भाजपाइयों को निकालने के लिए बल प्रयोग कर सकती है। इसी बीच सवा पांच बजे ग्रोवर हुड्डा खाप के नेताओं के साथ मंदिर की बालकनी पर आए और तीन बार बोले कि अब यहां नहीं आउंगा और हाथ जोड़ दिए। फिर पुलिस ने सारा ग्राउंड खाली करवाया और करीब पौने छह बजे भाजपा नेताओं को वहां से निकाला जा सका।