मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा।
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विधानसभा में दलीय स्थिति
भाजपा 40
कांग्रेस 30
जजपा 10
निर्दलीय 6
हलोपा 1
इनेलो 1
(नोट : मनोहर लाल और निर्दलीय रणजीत सिंह विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं।)
सरकार के पाले में 47 विधायक : प्रवीन आत्रेय
मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीन आत्रेय ने कहा कि प्रदेश सरकार अल्पमत में नहीं है। आज भी सरकार के पास 47 विधायकों का समर्थन है। इनमें भाजपा के 40 विधायक, 2 निर्दलीय राकेश दौलताबाद और नयनपाल रावत व हलोपा के विधायक गोपाल कांडा सरकार के साथ हैं। इनके अलावा जजपा के नारनौंद से विधायक रामकुमार गौतम, नरवाना विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा, टोहाना से विधायक देवेंद्र बबली और जोगीराम सिहाग का भी सरकार को समर्थन है। वैसे भी कानूनन सरकार के विरुद्ध छह महीन तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता, क्योंकि मार्च में कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाकर मुंह की खा चुकी है। कांग्रेस केवल लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता हकीकत जानती है।
अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विस सत्र बुलाना जरूरी
हरियाणा विधानसभा के पूर्व अतिरिक्त सचिव राम नारायण यादव ने बताया कि छह माह से पहले अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है, ऐसा कोई नियम नहीं है। यह केवल एक धारणा है, क्योंकि विधानसभा का सत्र छह माह में बुलाने का नियम है। अविश्वास प्रस्ताव सत्र के दौरान ही लाया जा सकता है, जबकि विश्वास मत हासिल करने के लिए राज्यपाल कभी भी कह सकते हैं। हालांकि, इसके लिए विपक्ष को राज्यपाल के पास जाकर बताना होता है कि उनके पास बहुमत है। अगर राज्यपाल संतुष्ट होते हैं तो वह सरकार को विश्वास मत हासिल करने के लिए कह सकते हैं और समय भी तय कर सकते हैं।
इच्छाएं पूरी करने को निर्दलीय विधायक कांग्रेस के पाले में गए : सीएम
विधायकों की कुछ इच्छाएं होती हैं। हर व्यक्ति कुछ इच्छा के साथ जुड़ा होता है। कांग्रेस आजकल इच्छाएं पूरी करने में लगी हुई है। हालांकि, लोग यह सब समझ रहे हैं कि किसकी इच्छा क्या है। कांग्रेस को जनता की इच्छाओं से मतलब नहीं है, उनको तो अपनी इच्छाओं से मतलब है।
-नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा