वर्ष 2000 से हर साल 21 फरवरी से अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जा रहा है। यूनेस्को ने 1999 में घोषणा की थी कि हर साल अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाएगा। इसे दिवस को मनाने की पहल सबसे पहले बांग्लादेश देश ने की थी। पिछले एक दशक में हरियाणवी बोली ने भी देश-दुनिया में अपनी छाप छोड़ी है और इस दिवस को मनाने के उद्देश्य को सार्थक किया है। समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और स्वदेशी भाषाओं के संरक्षण में भाषाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए इस साल के अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की थीम-बहुभाषी शिक्षा अंतर-पीढ़ीगत शिक्षा का एक स्तंभ है रखी गई है।
भाषा के महत्व को बताते हुए अभिनेता यशपाल शर्मा ने कहा कि आदमी चाहे किसी भी देश में चला जाए, चाहें कितना भी बड़ा हो जाए, कुछ भी काम करने लगे लेकिन जहां पैदा होता है जो बोली मां बाप से सीखता है, उसका मजा ही अलग है। मुझे दुख है कि आज के समय में फिल्मी जगत में और कुछ बड़े अफसर अपने बच्चों को पढ़ाते हुए कहते हैं कि हरियाणवी नहीं बोलनी चाहिए। हरियाणवी बोलते हुए लोगों में हीन भावना आती है उन्हें ऐसा नहीं सोचना चाहिए। जितनी भाषाएं आप सीखना चाहते हो सीख लो लेकिन अपनी भाषा नहीं भूलनी चाहिए।