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मातृभाषा: हरियाणवी बोली को देश-विदेश तक पहचान दिला रहे म्हारे सितारे, एक्टर यशपाल शर्मा बोले- इस पर गर्व करें

Wed, 21 Feb 2024 01:42 AM IST
भूपेंद्र सिंह श्वेता सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
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अमर उजाला कार्यालय पहुंचे अभिनेता यशपाल शर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (आर्काइव)
वर्ष 2000 से हर साल 21 फरवरी से अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जा रहा है। यूनेस्को ने 1999 में घोषणा की थी कि हर साल अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाएगा। इसे दिवस को मनाने की पहल सबसे पहले बांग्लादेश देश ने की थी। पिछले एक दशक में हरियाणवी बोली ने भी देश-दुनिया में अपनी छाप छोड़ी है और इस दिवस को मनाने के उद्देश्य को सार्थक किया है। समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और स्वदेशी भाषाओं के संरक्षण में भाषाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए इस साल के अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की थीम-बहुभाषी शिक्षा अंतर-पीढ़ीगत शिक्षा का एक स्तंभ है रखी गई है।

भाषा के महत्व को बताते हुए अभिनेता यशपाल शर्मा ने कहा कि आदमी चाहे किसी भी देश में चला जाए, चाहें कितना भी बड़ा हो जाए, कुछ भी काम करने लगे लेकिन जहां पैदा होता है जो बोली मां बाप से सीखता है, उसका मजा ही अलग है। मुझे दुख है कि आज के समय में फिल्मी जगत में  और कुछ बड़े अफसर अपने बच्चों को पढ़ाते हुए कहते हैं कि हरियाणवी नहीं बोलनी चाहिए। हरियाणवी बोलते हुए लोगों में हीन भावना आती है उन्हें ऐसा नहीं सोचना चाहिए। जितनी भाषाएं आप सीखना चाहते हो सीख लो लेकिन अपनी भाषा नहीं भूलनी चाहिए।
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अमर उजाला कार्यालय पहुंचे अभिनेता यशपाल शर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (आर्काइव)
शर्मा ने कहा कि अन्य भाषा में बोलोगे तो 100 में से 25 लोग समझ पाएंगे, लेकिन अगर अपनी बोली में बात करेंगे तो 100 में से 98 लोग उसे समझ लेंगे। अपनी बोली में कहानियां भी आनी चाहिए और साहित्य भी बनना चाहिए। पहली कक्षा से ही अपनी बोली की जरूरत बतानी चाहिए। हरियाणवी बच्चों को गर्व होना चाहिए कि हरियाणवी हमारी बोली है। यह गर्व का विषय है शर्म का नहीं। मैं तो हमेशा गर्व से कहता हूं कि मैं हरियाणा से हूं। आज धीरे-धीरे हरियाणवी सिनेमा प्रगति कर रहा है तो लोग गर्व से बोलने लगे हैं कि हम हरियाणवी हैं।  

यशपाल शर्मा बोले कि हमारी अपनी फिल्म दादा लख्मी फिल्म ने पूरी दुनिया में नाम कमाया है। अनेक नेशनल व इंटरनेशनल अवॉर्ड मिल गए। मेरा भी यही मानना है कि सबसे पहले फिल्म अपनी बोली में करें। 150 अभिनेता जो हरियाणा में पैदा हुए हैं वो आज गर्व से कह सकते हैं कि मैं अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड विजेता फिल्म का हिस्सा हूं। अगर ग्लोबल होना है तो पहले लोकल बनो।
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फौगाट परिवार के साथ आमिर खान
पिता बेटियों की मेहनत रंग लाई, अमीर खान तक को हरियाणवी सिखाई
हरियाणवी बोली को देश-विदेश में पहचान दिलाने में यहां के खेलों पर आधारित फिल्मों की अहम भूमिका रही है। चरखी दादरी जिले के बलाली गांव से निकली फौगाट बहनें और उनके पिता महाबीर फौगाट इसका एक उदाहरण हैं। फिल्म दंगल में अभिनेता आमिर खान ने महाबीर फौगाट की भूमिका निभाई और हरियाणवी भी सीखी। इस फिल्म के माध्यम से हरियाणवी बोली देशभर में सुनी और समझी गई। धाकड़ छोरी, म्हारी छोरियां छोरों से कम है के जैसे डायलाॅग ने भी हरियाणवी बोली को अलग पहचान दिलाई।

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नीरज चोपड़ा - फोटो : संवाद
नीरज चोपड़ा ने देश के लिए सोना जीता, हरियाणवियों का दिल
पानीपत जिले के खंडरा गांव के नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। नीरज चोपड़ा ने अपने सभी साक्षात्कार में हिंदी भाषा और हरियाणवी बोली को प्रमोट किया। उनके वीडियो भी वायरल हुए। एक वीडियो में किसी ने अंग्रेजी में सवाल पूछा तो नीरज ने हरियाणवी अंदाज में कहा कि हिंदी आती है... तो हिंदी में पूछो ना। हाल ही में स्टेज एप ने नीरज चोपड़ा को हरियाणवी बोली का प्रमोटर बनाया है।
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जयदीप अहलावत, रणदीप हुड्डा, राजकुमार राव, यशपाल शर्मा। - फोटो : सोशल मीडिया
इन कलाकारों ने हरियाणवी बोली से बॉलीवुड में बनाई अलग पहचान
रणदीप हुड्डा, जयदीप अहलावत, राजकुमार राव जैसे अभिनेताओं ने भी हरियाणवी बोली के लिए सराहनीय काम किया है। लाल रंग फिल्म में रणदीप हुड्डा का शंकर का किरदार हो या फिर पाताल लोक सीरीज में जयदीप अहलावत का इंस्पेक्टर हाथी राम चौधरी का किरदार। हाथी चौधरी के किरदार ने जयदीप अहलावत को अलग पहचान दिलाई।
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सपना चौधरी - फोटो : सोशल मीडिया
राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने वाली हरियाणवी फिल्में
डायरेक्टर राजीव भाटिया की हरियाणवी फिल्म पगड़ी द ऑनर ने दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। हरियाणवी कलाकारों और फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया। फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा की बनाई गई फिल्म दादा लख्मी को 68वें राष्ट्रीय फिल्म अवाॅर्ड में बेस्ट क्षेत्रीय फिल्म का पुरस्कार जीता। यह फिल्म ठेठ हरियाणवी बोली और पं. लख्मीचंद के प्राचीन संगीत और उनके जीवन पर आधारित है।

वर्ष 2000 में आई हरियाणवी फिल्म लाडो को किसी निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फिल्म के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार मिला। 63वें राष्ट्रीय फिल्म अवाॅर्ड में डायरेक्टर संदीप शर्मा की फिल्म सतरंगी को बेस्ट हरियाणवी फिचर फिल्म का अवाॅर्ड मिला। 23 दिसंबर 2016 को हरियाणवी पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ने 62वें राष्ट्रीय फिल्म अवाॅर्ड में 4 श्रेणियों में पुरस्कार जीते।

डीजे की पसंद बने हरियाणवी गाने
पिछले कुछ वर्षों में हरियाणवी बोली के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा सोशल मीडिया और डीजे पर हरियाणवी गानों के बढ़ते प्रचलन से लगाया जा सकता है। हरियाणवी गानों से पहचान बनाने वाली कलाकार सपना चौधरी कान फिल्म फेस्टिवल में भाग लेने वाली पहली हरियाणवी कलाकार बन गई हैं।
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