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पानीपत: कार में तीन दोस्तों के जिंदा जलने का मामला, डीएनए जांच से की जाएगी शवों की पहचान

Sat, 16 Apr 2022 02:30 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, इसराना/पानीपत (हरियाणा)

सार

तीनों शव इतनी बुरी तरह जले हैं कि पहचान कर पाना मुश्किल है। रिटायर्ड फौजी सितमपाल बोले- अब पोतों के लिए जीना पड़ेगा।
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विक्रांत, सुगम, पंकज का फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरियाणा के पानीपत के इसराना में कार में आग लगने से जिंदा जले विक्रांत, पंकज और सुगम के सिर्फ कंकाल ही बचे हैं। इनकी पहचान कर पाना मुश्किल हैं। ऐसे में अब डीएनए जांच के जरिए ही तीनों की पहचान हो सकेगी। तीनों मृतकों के परिजन बारी-बारी से शवगृह में गए और शवों की शिनाख्त करने का प्रयास किया लेकिन यह संभव नहीं हो सका। ड्राइविंग सीट पर मिले शव का ही फिलहाल पोस्टमार्टम हो सका है।

बाकी ड्राइविंग सीट के बगल और पीछे की सीट पर मिलने शव का पोस्टमार्टम शनिवार को होगा। फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. नारायण  डबास तीनों शवों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराएंगे। शनिवार को डीएनए जांच के लिए सैंपल मधुबन स्थित फॉरेंसिक लैब भेजे जाएंगे। शवों का विसरा भी सुरक्षित किया जाएगा। समय रहते डीएनए रिपोर्ट नहीं आई तो परिजनों के सामने समस्या होगी कि अंतिम संस्कार कैसे करें। यह पता ही नहीं है कि कौन सा शव किसका है। 
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कार से शवों को निकालते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सितमपाल पर टूटा दुखों का पहाड़ 
सितमपाल आर्मी से लांस नायक के पद से रिटायर्ड हैं। फिलहाल वह इनेलो में लेबर प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष भी हैं। शवगृह के बाहर भरी आंखों से सितमपाल कहते रहे कि पहले एक बेटे का दुख था अब दोनों बेटों का दुख हो गया। बड़ा बेटा मनीष सड़क हादसे में अपंग हो चुका है। छोटे बेटे की दर्दनाक मौत हो गई। अब दोनों पोते के लिए ही जीना पड़ेगा।
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पानीपत रोहतक नेशनल हाईवे पर इसराना के पास कार में लगी आग बुझाए जाने के बाद पास में खड़े पुलिस कर्मी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ा बेटा का चौदस को हुआ था घायल, छोटे बेटे की चौदस को हुई मौत
सितमपाल राठी ने बताया कि वर्ष 2014 में बड़े बेटे मनीष का चौदस को एक्सीडेंट हुआ था। तब से वह अपंगता का जीवन गुजार रहा है। अब शुक्रवार को चौदस के दिन ही छोटे बेटे विक्रांत की  मौत हुई है।

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अस्पताल के बाहर खड़े परिजन। टक्कर के बाद उखड़ी गाड़ी की नंबर प्लेट। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बिलख पड़े सितमपाल, बोले कब तक खुद को रोकूंगा
सितमपाल को नूरवाला के सुरेंद्र सोनी ने विक्रांत के हादसे की जानकारी दी थी। तीन बजे सितमपाल अकेले ही सिविल अस्पताल के शवगृह में पहुंच गए। यहां पर उसने विक्रांत की पहचान करने का प्रयास किया लेकिन पहचान नहीं सके। विक्रांत की कार थी इसलिए ये मानना पड़ा कि बेटे की मौत हो गई है। विक्रांत की पत्नी रेणू अस्पताल पहुंची तो सितमपाल ने ये कहकर उसे घर भेज दिया कि वह विक्रांत को लेकर घर आएंगे। कुछ देर बाद जब परिवार के दूसरे लोग अस्पताल पहुंचे तो सितमपाल की हिम्मत टूट गई और बिलख पड़े। बोले कि कब तक खुद को रोकूंगा।
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पानीपत में हादसे के बाद कार में लगी आग। - फोटो : अमर उजाला
डीएनए जांच में ही पता चलेगा  कौन सा शव किसका है
शव सौ प्रतिशत तक जल चुके हैं। अब कौन सा शव किसका है ये पता लगाना मुश्किल है। तीनों शवों के डीएनए सैंपल भेजे जाएंगे। शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को देंगे।  - डॉ. नारायण डबास, फॉरेंसिक एक्सपर्ट सिविल अस्पताल
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