पशु प्रदर्शनी में आए लोगों पर ड्रोन से गंगाजल का छिड़काव करते हुए ।
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18 से 20 किलो दूध दे रही मोखरा की गाय, देसी सांड़ बने पहचान
मोखरा से आए देसी सांड़ और गाय सबके आकर्षण का केंद्र रही। यहां का एक सांड़ द्वितीय रहा तो एक को सांत्वना पुरस्कार मिला। गाय तृतीय रही। पशुपालक सचिन, अजीत, साहिल ने बताया कि उनके यहां सिर्फ देसी गाय और सांड़ ही है। वे देसी गायों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं और प्रयास करते हैं कि हर गांव में देसी गाय पाली जाए। अब अच्छी नस्ल की देसी गाय होगी तो पशुपालक भी उसे रखना पसंद करेंगे। इसी कारण अच्छे देसी सांड़ उनके पास है, जिनके सीमन महज 100 रुपये में देते है़। हमारे यहां की गाय 12 से 15 किलो दूध देती है। हमारे यहां करीब 12 गाय है और अच्छी नस्ल के सांड़ है़। सांड़ को चने, फीड, दूध, बिनौले आदि खिलाते हैं।
पटवारी के पंजाब तक चर्चे
भिवानी के गांव सैय वासी जोगेंद्र के महज साढ़े माह के कटड़े पटवारी के चर्चे पंजाब तक हैं। मुर्राह नस्ल का कटड़ा पटवारी अपने सिलकी बालों के कारण खासा चर्चा में है और पंजाब में हुई स्पर्धाओं में इनाम भी जीत चुका है। भिवानी में उम्र कम होने के कारण वह किसी स्पर्धा में भाग नहीं ले सकता। जोगेंद्र बताते है कि उनकी गांव में डेयरी है और उसे पशुओं ने काफी पहचान दिलाई है। साथ ही आर्थिक स्थिति भी सुधारी है।