सरकार चाहे जिसकी रहे, अफसर कोई भी हो, पशु तस्करी पर लगाम नहीं लग पा रहा है। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह अवैध धंधा अब काली कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है। सहारनपुर से लेकर कुशीनगर तक पशु तस्करों का एक लंबा नेटवर्क है। पहले अपनी कमाई के लिए पशु तस्करों को संरक्षण देने वाली पुलिस अब खुद सुरक्षा के उपाय खोज रही है।
सूबे में भाजपा की सरकार बनते ही पशु तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने का निर्देश मुख्यमंत्री ने स्वयं दिया था। जगह-जगह अवैध स्लाटर हाउस बंद कराए जाने लगे। गोवंशीय पशुओं के प्रति भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगाध प्रेम को देखते हुए लोगों में उम्मीद जगी कि पशु तस्करी पर इस बार जरूर रोक लग जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पिछली सरकारों में पगडंडी और ग्रामीण सड़कों के रास्ते चल रहा तस्करी का धंधा मुख्य मार्ग पर आ गया। बीते तीन चार साल में लखनऊ-गोरखपुर-मुजफ्फरपुर हाईवे के रास्ते गोवंशीय पशुओं से भरी ट्रकें बिहार भेजी जाने लगी हैं।
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कैमरे में कैद वारदात व हमले में क्षतिग्रस्त वाहन।
- फोटो : अमर उजाला।
बिहार बार्डर स्थित कुशीनगर जिले के तरयासुजान थाना क्षेत्र में महीने में तीन से चार बार पशु तस्करी का मामला पकड़ा जाता है। एसओ कपिलदेव चौधरी बताते हैं कि हाइवे पर पकड़े जाने वाली ट्रक अधिकांश पश्चिमी यूपी की होती हैं। मेरठ, सहारनपुर, बागपत आदि जिलों के रहने वाले पशु तस्कर हाईवे के रास्ते पशुओं की खेप बिहार तक पहुंचाते हैं।
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हमले में क्षतिग्रस्त वाहन।
- फोटो : अमर उजाला
पशु बाजार बड़े मददगार
कुशीनगर के अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के टीकर में हर सप्ताह बुधवार को पशु बाजार लगता है। इसी तरह संतकबीरनगर जिले के बखिरा थाना क्षेत्र के नारायनपुर में भी पशु बाजार लगता है। अगल-बगल से चुराए गए या दूसरे जिलों से लाए गए पशुओं को इन बाजारों में लाकर बेचा जाता है। पुलिस सूत्रों की मानें तो पिछले साल कुशीनगर जिले के तरयासुजान थाना क्षेत्र में संतकबीरनगर जिले की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी की छह ट्रक पकड़ी गई थीं। इन सभी पर तस्करी के जरिए बिहार भेजे जा रहे पशु लादे गए थे।
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सीसीटीवी कैमरे में कैद घटना।
- फोटो : अमर उजाला।
चिह्नित तस्कर को भी नहीं पकड़ सकी पुलिस
कुशीनगर जिले के टॉप टेन बदमाशों की सूची में शामिल जवाहर यादव जटहा बाजार थाना क्षेत्र के विशुनपुरा बुजुर्ग गांव का रहने वाला है। इस पर पशु तस्करी समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। बीते मई में गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस टीम पर हमला करने वाले पशु तस्करों में इसका भी नाम सामने आया था। इसकी गिरफ्तारी के लिए गोरखपुर व कुशीनगर पुलिस ने कई बार दबिश दी, लेकिन जवाहर का कहीं पता नहीं चला।
तस्करों से डरती है पुलिस
कुशीनगर जिले में तैनात रहे एक इंस्पेक्टर ने पशु तस्करों के मजबूत होते धंधे पर चर्चा के दौरान आश्चर्यजनक हकीकत बयां की। बताया कि रात में निकले पशु तस्करों की गाड़ी को रोकना मौत से मुकाबला करने के बराबर है। वजह यह कि पशु तस्कर अपनी गाड़ियों के आगे लोहे का एंगल लगाकर चलते हैं। ड्राइवर शराब के नशे में धुत होता है। पुलिस के पास कोई ऐसा उपकरण नहीं है, जिसकी मदद से गाड़ियों को रोका जाए। तस्करों को पकड़ने के लिए एक साथ कई दिन तक वृहद अभियान चलाना होगा।
गोरखपुर एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि कुशीनगर व गोरखपुर की संयुक्त टीम पशु तस्करों की तलाश में लगाई गई है। दोनों जिलों की पुलिस आपस में जानकारियों को साझा करेगी। इसके लिए दोनों जिलों के एसपी को पत्र भेजा गया है।