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Exclusive: टाइट जींस और सिंथेटिक कपड़ों से हो सकती है ये गंभीर बीमारी, पहनावे में तुरंत करें बदलाव

Wed, 23 Mar 2022 12:48 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।
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jeans - फोटो : Social Media
टाइट जींस और चुस्त कपड़े लोगों को फंगस के साथ दाद का दर्द दे रहे हैं। जिला अस्पताल के चर्म रोग विभाग की ओपीडी में 30 से 40 फीसदी मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इनमें से 90 प्रतिशत मरीजों में 25 से 35 वर्ष के युवक-युवतियां और महिलाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक फंगस और दाद की वजह टाइट सिंथेटिक कपड़े भी हैं। लोगों को सलाह दी जा रही है कि बदल रहे मौसम की वजह से पहनावे में बदलाव करें, नहीं तो यह परेशानी लगातार बढ़ती जाएगी।
 
 
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खुजली
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके वर्मा ने बताया कि त्वचा संबंधी मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले सुपरफिशियल फंगल इंफेक्शन के हैं। साइंस की भाषा में इसे टिनिया और साधारण भाषा में दाद कहा जाता है। सुपरफिशियल फंगल इंफेक्शन तीन तरह के होते हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले आम ट्राइकोपाथॉन के होते हैं। पिछले कुछ दिनों से ट्राइकोपाथॉन मेटाग्रोफाइट और इसका वैरिएंट ज्यादा असरदार हो गया है।

 
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jeans - फोटो : istock
ट्राइकोपाथॉन मेटाग्रोफाइट का इलाज 25 सप्ताह चलता है, जबकि ट्राइकोपाथॉन रुबर्म 12 सप्ताह के इलाज में ही ठीक हो जाता है। इस वक्त गर्मी की वजह से लोगों में ट्राइकोपाथॉन मेटाग्रोफाइट के मामले मिल रहे हैं, जिनका इलाज लंबे समय तक चल रहा है। उन्होंने बताया कि लोग खुद जाकर मेडिकल स्टोर से दाद की दवा ले रहे हैं, जो उनके लिए ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि मेडिकल स्टोर पर अधिकांश क्रीम स्टेरायड युक्त हैं, जो शरीर के लिए काफी नुकसानदायक हैं। इन क्रीमों का इस्तेमाल करने के बाद कुछ समय के लिए समस्या खत्म हो जाती है, लेकिन फिर से दाद के बैक्टीरिया जिंदा हो जाते हैं, जो बार-बार परेशान करते हैं।

 

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jeans - फोटो : istock
चर्म रोग का इलाज महंगा
डॉ. एनके वर्मा ने बताया कि त्वचा संबंधी दवाएं काफी महंगी हैं। ऐसे में मरीज ज्यादा दिनों तक दवाओं का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इस वजह से समस्या बढ़ती जाती है। अधिकांश लोग दाद के लिए इंट्राकोनोजॉल का इस्तेमाल भी करते हैं, लेकिन बार-बार इस दवा का इस्तेमाल लोगों को बेअसर कर जाती है। ऐसे में फंगस और दाद के मरीज बिना सलाह के दवा का इस्तेमाल न करें।
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चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके वर्मा। - फोटो : अमर उजाला।
जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके वर्मा ने कहा कि बदल रहे मौसम में युवक-युवतियां और महिलाएं टाइट जींस और सिंथेटिक कपड़े पहन रही हैं। इससे दाद और फंगस का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे मरीज लगातार ओपीडी में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को समझाया जा रहा है कि ढीले और सूती कपड़े पहनें, इससे दाद और फंगस का खतरा कम रहता है।



 
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