रंगों के त्योहार में जरा सी चूक आपको बीमार बना सकती है। होली पर बाजार में रासायनिक रंगों की भरमार होती है। ऐसे रंगों से सांस की बीमारी हो सकती है। अस्थमा अटैक आ सकता है। आंखों की रोशनी जाने और त्वचा में कैंसर का खतरा रहता है। किडनी भी फेल हो सकती है।
चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि होली का रंग मुंह, नाक और आंख में न जाए। वरना सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। रंग-गुलाल की मस्ती उनके लिए नुकसानदायक हो सकती है, जो सांस से संबंधित बीमारियों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सांस लेने में समस्या, लंग्स इंफेक्शन के मरीज हैं। अस्थमा फेफड़ों की ऐसी बीमारी होती है, जिसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है। होली के रंग अगर अनजाने में अस्थमा से पीड़ित किसी मरीज की सांस में चला जाए, तो उसे अस्थमा अटैक आ सकता है।