फिराक गोरखपुरी का मकान।
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फिराक साहब का पुश्तैनी खपरैल का मकान देखरेख के अभाव में पूरी तरह से जर्जर हाल में पहुंच चुका है। बारिश की वजह से कुछ दिन पहले फिराक साहब के मकान का कुछ हिस्सा ढह गया, लेकिन आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने तक की जहमत नहीं उठाई। इस बात को लेकर बनवारपार के लोगों के साथ ही साहित्य व शायरी में रुचि रखने वालों में बेहद आक्रोश है। प्रवीण श्रीवास्तव, शंभूनाथ मिश्र, महीप श्रीवास्तव, संतोष कुमार, हरिद्वार यादव, डॉ. तालिब गोरखपुरी का कहना है कि फिराक साहब से जुड़ी स्मृतियों को संरक्षित नहीं कर पाना अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का परिचायक है। लोगों ने शासन-प्रशासन से खंडहर में तब्दील हो चुकी फिराक के पुश्तैनी मकान के जीर्णोद्धार के साथ ही पर्यटन स्थल बनवाने की मांग की है।