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तस्वीरें: यूपी के इस मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन मेले में लगती थी कोर्ट, सुलझाए जाते थे जमीन संबंधी विवाद

Thu, 11 Mar 2021 01:08 PM IST
vivek shukla दीन दयाल शुक्ल, संतकबीरनगर (हरिहरपुर)।
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Baba tameshwar nath - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के संतकबीनगर जिले के तामेश्वरनाथ मेला परिसर में सत्तर के दशक में महाशिवरात्रि के दौरान कोर्ट भी लगती थी। जहां राजस्व संबंधी मामलों की सुनवाई होती थी। एसडीएम और तहसीलदार के साथ राजस्व कर्मियों की मौजूदगी में क्षेत्र के विभिन्न लंबित मामलों का मौके पर निस्तारण किया जाता था। वक्त बदला और व्यवस्था बदली तो मेले में कोर्ट लगने की प्रक्रिया पर भी विराम लग गया, लेकिन बुजुर्गों के जेहन में आज भी बीते वक्त की यादें ताजा हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
 
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Baba tameshwar nath - फोटो : अमर उजाला।
तामेश्वरनाथ गांव निवासी बुजुर्ग बलदेव भारती, झारखंडे भारती ने बताया कि सत्तर के दशक में तामेश्वरनाथ मेले के दौरान मंदिर के दक्षिण में स्थित बाग में एसडीएम की कोर्ट लगती थी। इसमें क्षेत्र के लोगों के राजस्व संबंधी मामलों का निपटारा किया जाता था। न्याय की उम्मीद लगाए बैठे क्षेत्रवासियों को मेले का इंतजार रहता था। आस-पास के लोग अपने मामलों को सक्षम अधिकारी के समक्ष रखते थे। जहां दी गई तारीख पर दोनों पक्षों की मौजूदगी में मामलों का त्वरित निस्तारण होता था।

 
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Baba tameshwar nath - फोटो : अमर उजाला।
लोगों का यह भी कहना है कि पहले यह मेला आज से भी बेहतर लगता था। लोग खरीदारी के लिए मेले का इंतजार करते थे। शहर और बड़े बाजार आम लोगों की पहुंच से दूर होते थे। इस कारण लोग शादी-विवाह के लिए सामान मेले में ही खरीदते थे। इसमें लकड़ी के बेड, कुर्सी, बॉक्स और बर्तनों की खरीदारी करते थे। ग्राम प्रधान नरेंद्र नाथ भारती बताते हैं कि गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उन्हें भी याद नहीं है कि यहां मेला कब से लग रहा है। लोगों ने जबसे होश संभाला तबसे मेले का आयोजन हो रहा है।

 

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Baba tameshwar nath - फोटो : अमर उजाला।
मेले में तय होते थे शादी के रिश्ते
आज के दौर में संसाधन और तकनीक की वजह से शहरों की दूरियां सिमट गईं हैं। लोगों के पास कहीं भी आने-जाने के लिए संसाधनों की उपलब्धता पर्याप्त हो गई है। वरना करीब तीन दशक पूर्व तक तामेश्वरनाथ मेले में गरीब परिवारों की शादियों के लिए रिश्ते भी तय हुआ करते थे। इसके लिए लोगों को तामेश्वरनाथ मेले का बेसब्री से इंतजार रहता था।

 
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Baba tameshwar nath - फोटो : अमर उजाला।
प्रधानाचार्य राम कृष्ण भारती ने बताया कि मंदिर के दक्षिण स्थित बाग में अलग-अलग बिरादरी की जमात इकट्ठा होती थी। इसी दौरान लोग अपने रिश्तेदारों के माध्यम से अपनी कन्याओं के लिए वर का चयन भी करते थे। रिश्ता तय हो जाने के बाद लोग मेले में ही लकड़ी के सामान, बॉक्स व गृह उपयोगी सामान की खरीदारी करते थे।
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