कबीर दास।
- फोटो : social media
कबीर साहेब ने उनसे यहां आने का कारण पूछा। नवाब ने उन्हें बताया कि उनके क्षेत्र में 12 वर्षों से लगातार अकाल पड़ रहा है। वर्षा नहीं हो रही है इसलिए अन्न जल का अभाव हो गया है, प्रजा भूखों मर रही है। यहां कबीर साहेब से आने का आग्रह किया, ताकि समस्याएं दूर हो जाए।
कबीर साहेब के गोरखपुर (मगहर) जाने की बात जब काशी के लोगों ने सुनी तो बड़ा विरोध हुआ। कहा गया जो काशी में मरता है, वह स्वर्ग में जाता है, जो मगहर में जाता है तो उसे नरक मिलता है, लेकिन कबीर साहेब बिना किसी परवाह के यहां आने की ठानी। कबीर साहेब ने काशी में शरीर नहीं त्यागने का निर्णय लिया और अंध विश्वास को दूर करने की कोशिश की।