gorakhnath temple
- फोटो : आनंद चौधरी।
तिवारी के मुताबिक यहां पर चारो तरफ जंगल था। इस नाते गुरु गोरखनाथ यहां पर रुके थे। वह कहते हैं कि इसके अगल-बगल के पचास से अधिक गांव ऐसे हैं जिनका नाम आज भी जंगल से जुड़ा है। जैसे जंगल कौड़िया, जंगल तिकोनियां, जंगल सालिगराम जैसे अनेक ऐसे गांव हैं। गुरु गोरखनाथ द्वारा जलाया गया धूनी आज भी उसी तरह से अनवरत जल रहा है। उसे जलाने के लिए वन विभाग की तरफ से लकड़ी दी जाती है।