कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से डरने की जरूरत नहीं है। वायरस का यह म्यूटेशन डेल्टा, डेल्टा प्लस और कप्पा वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक नहीं है। हालांकि, इसके संक्रमण की दर अन्य म्यूटेशन से अधिक है। इसलिए ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। अब तक विश्व भर में ओमिक्रॉन के करीब 900 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। सभी केसों पर टीमें निगरानी कर रहीं हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि बावजूद इसके कोविड प्रोटोकॉल के पालन में सख्ती बनाए रखें, किसी भी वायरस से बचाव का इससे बेहतर कोई रास्ता नहीं है।
ये बातें इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. समीरन पांडा ने कहीं। वह गोरखपुर में बने रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) के भवन के उद्घाटन समारोह में आए थे। बुधवार को उन्होंने आरएमआरसी के नए भवन का निरीक्षण कर सुविधाओं के बारे में भी जाना। उन्होंने बताया कि विश्व में अब तक ओमिक्रॉन के 900 केस मिल चुके हैं। सभी केसों की डब्ल्यूएचओ और अन्य स्वास्थ्य संस्थाएं निगरानी कर रहीं हैं।
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आईसीएमआर के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. समीरन पांडा।
- फोटो : अमर उजाला।
राहत की बात यह है कि इनमें अधिकांश मरीज घर पर ही इलाज से ठीक हो जा रहे हैं। इन मरीजों में ऑक्सीजन लेवल का तेजी से कम होना, फेफड़ों में धब्बा (फाइब्रोसिस) जैसे लक्षण नहीं मिल रहे हैं। इन 900 मरीजों में महज तीन से चार मरीज ही गंभीर हुए हैं, जिस पर शोध चल रहा है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि दूसरी लहर की तुलना में यह ज्यादा खतरनाक नहीं साबित होगा। लेकिन, इसके बाद भी ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है। अगर लापरवाही हुई तो संक्रमण का खतरा बढ़ेगा। बताया कि कोरोना पर लगातार शोध चल रहा है। शोध में यह बातें सामने आई हैं कि वायरस लगातार म्यूटेट हो रहा है। इसकी वजह से थोड़ी दिक्कतें आ रहीं हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
संक्रमण की दर है तेज
डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि ओमिक्रॉन के संक्रमण की दर अन्य वैरिएंटों से अधिक है। इस बात की पुष्टि अब तक आए केसों से हो चुकी है। कम्यूनिटी में इसका असर तेजी से लोगों पर हो रहा है। हालांकि इसकी मारक क्षमता और संक्रमण दर को लेकर शोध चल रहा है। जब तक शोध के नतीजे न आ जाएं, तब तक इस पर कुछ भी कह पाना मुश्किल है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
लोग वैक्सीन जरूर लगवाएं
डॉ. समीरन पांडा ने लोगों से अपील की है कि कोविड का टीका जरूर लगवाएं। वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित और असरदार है। अगर वायरस का म्यूटेशन भी होता है तो भी वैक्सीन असर जरूर करेगी। इसलिए लोगों को वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए।
एचआईवी की दवाओं पर चल रहा शोध
पुणे स्थित नेशनल एड्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (नारी) के निदेशक रहे डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि एचआईवी संक्रमण के नजरिए से यह दशक बेहद खास होगा। वर्ष 2030 तक एचआईवी संक्रमण को पूरी तरह से नियंत्रित कर लेने की तैयारी चल है। एचआईवी के संक्रमण क्षमता को कमजोर करने की दवाओं पर शोध अंतिम चरण में है। इस शोध के बाद से एचआईवी मरीजों को काफी राहत मिलने वाली है।