गोरखपुर में नदी, नाले, ताल-पोखरे के किनारे बसी गोरखपुर शहर की घनी आबादी को अब हर साल बरसात में बाढ़ जैसे हालात का सामना करना पड़ेगा। दरअसल, दो दशक आगे का ख्याल करके जलभराव की समस्या के इलाज के लिए जो ‘दवा’ दी जा रही है, वही और बड़ी समस्या का सबब बनेगी। जानकार बताते हैं कि शहर की सड़कों व नालों की जो ऊंचाई बढ़ाई गई है, उसने निचले इलाकों के पानी का बहाव बाधित कर दिया है। यही वजह है कि समस्या के वैकल्पिक समाधान के लिए नगर निगम ने 300 से अधिक पंप पिछले एक पखवारे से चला रखे हैं, फिर भी राहत नहीं मिल पा रही है।
यह स्थिति तब है, जबकि इस बार शहर में सामान्य बारिश हुई है और कई जगह कच्चे नाले भी खोदे गये हैं। अगले साल तक जब सभी नालों का निर्माण पूरा हो जाएगा, यह बरसात शहरवासियों के बाढ़ जैसे जलभराव से जूझने को मजबूर करेगी।